Tuesday, July 27, 2021

 

 

 

मालेगांव केस में NIA को झटका, अदालत ने कैमरा की मौजूदगी में सुनवाई से…

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मुंबई की एक विशेष अदालत ने मालेगांव ब*म धमाके 2008 के मामले में सुनवाई करते हुए NIA की उस मांग को ठुकरा दिया जिसमे मामले की सुनवाई कमैरे की निगरानी में करने की मांग की गई थी।

अदालत ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के उस आवेदन को भी खारिज कर दिया जिसमे कहा गया था कि मीडिया ट्रायल से इस मामले को दूर रखा जाए। NIA की इस मांग के खिलाफ इंडियन एक्स्प्रेस के पत्रकार समेत 11 पत्रकारों ने इस खिलाफ आवेदन किया था।

एनआईए के विशेष न्यायाधीश वी एस पडालकर ने कहा कि एनआईए की याचिका को अस्वीकार करने के कारणों में से यह है कि सुनवाई पारदर्शी तरीके से ‘ की जा सके।कैमरे की मौजूदगी में सुनवाई में केवल न्यायाधीश, अधिवक्ता, आरोपी तथा प्रत्यक्षदर्शी की मौजूद रहते हैं।

इस तरह की सुनवाई में मीडिया या जनता को कार्यवाही की जानकारी नहीं दी जाती है।हालांकि मामले की संवेदनशीलता और गैरकानूनी गतिविधियों (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) और एनआईए अधिनियम के प्रावधानों का हवाला देते हुए NIA का कहना था कि विशेष अदालत के पास इन-कैमरा कार्यवाही करने के लिए आदेश पारित करने का अधिकार है।

एनआईए द्वारा दिए गए प्रावधानों में एनआईए अधिनियम की धारा 17 और यूएपीए की धारा 44 है, जो गवाहों की सुरक्षा के लिए अदालत को अपने नाम का उल्लेख करने से बचने, अपनी पहचान सुरक्षित करने के निर्देश जारी करने और सभी या किसी भी कार्यवाही के लिए आदेश देती है।

अगर एनआईए की याचिका को कोर्ट ने मंजूरी दे दी होती तो अभियोजन पक्ष, अभियुक्तों और उनके वकीलों, साथ ही एक हस्तक्षेपकर्ता (विस्फोट में मारे गए पीड़ित के पिता) के लिए वकील सहित किसी भी व्यक्ति को मामले में शामिल नहीं होने दिया जाएगा।

पत्रकारों के आवेदन को लेकर एनआईए का कहना है कि वह “बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, प्रेस की स्वतंत्रता और सूचना के अधिकार” के पक्ष में है, इस मामले की संवेदनशीलता को देखतने हुए देखते हुए इन-कैमरा सुनवाई के लिए याचिका दायर की गई है।

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