पूर्वोत्तर दिल्ली में हुए सां’प्रदायिक दं’गों के मुख्य आरोपियों में से एक आप पार्टी के निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन को कड़कड़डूमा कोर्ट ने बड़ा झटका देते हुए जमानत याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा है कि दिल्ली के दं’गों का परिणाम गहरी साजिश नजर आ रही है।

कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने कहा कि इसके पर्याप्त सबूत हैं कि आरोपी घटना अपराध स्थल पर मौजूद था और एक विशेष समुदाय के लोगों को भड़काने का काम कर रहा था। ताहिर हुसैन आईबी कर्मचारी अंकित शर्मा की ह’त्या के मामले में भी मुख्य आरोपी है।

न्यायाधीश विनोद यादव ने कहा कि हुसैन ने दंगों के दौरान अपने हाथों का इस्तेमाल नहीं किया मगर दंगाइयों को ‘मानव हथियार’ के रूप में इस्तेमाल किया। कोर्ट ने यह भी कहा PFI, पिंजरातोड़ और जामिया के सदस्यों के साथ इसके अलावा समन्वय समिति, यूनाइटेड अगेंस्ट हेट ग्रुप और एंटी-सीएए प्रदर्शनकारियों के साथ ताहिर  के संबंध की भूमिका भी जांच हो रही है।

ताहिर हुसैन कोर्ट में अर्जी दाखिल कर जमानत देने की मांग की थी। मार्च से न्यायिक हिरासत में चल रहे हुसैन ने इस आधार पर जमानत मांगी थी कि शर्मा की कथित हत्या से उसे जोड़ने के लिए कोई ठोस सबूत नहीं है। गौरतलब है कि CAA के समर्थकों और विरोधियों के बीच संघर्ष के बाद 24 फरवरी को उत्तर-पूर्वी दिल्ली के जाफराबाद, मौजपुर, बाबरपुर, घोंडा, चांदबाग, शिव विहार, भजनपुरा, यमुना विहार इलाकों में सांप्रदायिक दंगे भड़क गए थे।

इस हिंसा में कम से कम 53 लोगों की मौ’त हो गई थी और 200 से अधिक लोग घाय’ल हो गए थे। ताहिर हुसैन पर हथियार खरीदने के लिए पैसे देने का आरोप है। ताहिर हुसैन पर यह भी आरोप है कि उसके घर की छत से कई आरोपी भीड़ पर फायरिंग कर रहे थे।

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