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देश में 1984 में हुए दिख दंगों के मामले में 34 साल बाद पहली बार अदालत का फैसला आया है। जिसमे नरेश सेहरावत और यशपाल सिंह को दोषी करार दिया गया है।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अजय पांडेय ने फैसले में कहा कि भीड़ के नारों व जिस तरह से इस अपराध को अंजाम दिया गया, उससे साफ है कि दंगाई भीड़ ने जान बूझकर सामूहिक मंशा से हरदेव सिंह व अवतार सिंह की ह’त्या की।

अदालत ने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष नरेश सेहरावत व यशपाल सिंह के खिलाफ आरोपों को संदेह से परे साबित करने में कामयाब रहा है। चश्मदीद गवाहों संगत सिंह व कुलदीप सिंह, गवाह सुरजीत सिंह व एसआई जयपाल सिंह के बयानों से साफ है कि यह दोनों दंगा करने वाली भीड़ का हिस्सा थे।

अदालत ने फैसले में कहा कि भीड़ ने न केवल हिंसा की बल्कि सुरजीत सिंह के घर व संगत सिंह, कुलदीप सिंह व हरदेव की दुकान से सामान भी लूटा और उसके बाद आग लगा दी। इस समय नरेश के हाथ में मिट्टी के तेल का डिब्बा था। नरेश से सुरजीत के घर के दरवाजे पर तेल डाला और यशपाल ने माचिस से वहां आग लगा दी।

एक नवंबर 1984 की सुबह नौ बजे करीब एक हजार लोगों की भीड़ ने सुरजीत सिंह के घर का दरवाजा व खिड़कियां तोड़ दीं। सुरजीत सिंह के घर छिपे अवतार सिंह, सुरजीत सिंह, कुलदीप सिंह, संगत सिंह व हरदेव सिंह को बाहर निकाल लिया। भीड़ ने पीड़ितों को मारने की नीयत से सुरजीत के मकान की पहले मंजिल से नीचे फेंक दिया।

पहली मंजिल से नीचे गिरने पर हरदेव सिंह व अवतार सिंह की मौ’त हो गई। इसी तरह फेंके जाने से सुरजीत सिंह, संगत सिंह व कुलदीप सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए। अदालत ने कहा कि अगर इन लोगों की मौत हो जाती तो यह पूरी भीड़ इन लोगों की ह’त्या की दोषी मानी जाती।

34 साल पहले हुए सिख दंगे से जुड़े इस मामले में नतीजे तक पहुंचने के लिए अदालत ने एसआईटी और जांच अधिकारी की तारीफ की। जिन्होंने हर सुनवाई पर मौजूद रहकर केस की कार्यवाही बाधित नहीं होने दी। बता दें कि 2014 में मोदी सरकार आने के बाद गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने 1984 दंगा मामले में एसआईटी का गठन किया था।

एसआईटी में कुल तीन सदस्य हैं। चेयरमैन अनुराग कुमार, रिटायर्ड जिला जज राकेश कपूर और दिल्ली पुलिस के डीसीपी कुमार ज्ञानेश. एसआईटी की मियाद जनवरी 2019 तक है. एसआईटी ने कई मुकदमो की दोबारा जांच की। ये पहला मामला है. जिसकी एसआईटी ने जांच की जिसके बाद आरोपियों को कोर्ट ने दोषी माना है।

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