नई दिल्ली | करीब छह साल पहले दिल्ली के जंतर मंतर पर भ्रष्टाचार के खात्मे के लिए शुरू हुआ अन्ना आन्दोलन , आम आदमी पार्टी के उदय के साथ खत्म हुआ. उस समय कहा गया की यह पार्टी सिस्टम में व्याप्त भ्रष्टाचार की लड़ाई लड़ने के लिए बनायीं जा रही है. दिल्ली के लोगो में पार्टी और इसके नेता अरविन्द केजरीवाल को लेकर काफी विश्वास था. यही कारण था की पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ रही इस नयी नवेली पार्टी को 28 सीटे प्राप्त हुई.

करीब एक साल बाद हुए दोबारा हुए विधानसभा चुनावो में इस पार्टी ने इतिहास रचते हुए 70 में से 67 सीटो पर जीत दर्ज की. अरविन्द केजरीवाल के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी की सरकार बनी और लोगो को विश्वास हो गया की अब दिल्ली से भ्रष्टाचार का अंत हो जायेगा. पिछले ढाई साल से यह सरकार दिल्ली में बेहतर तरीके से काम कर रही है. इस सरकार ने भ्रष्टाचार के ऊपर काफी हद तक लगाम लगाया है.

इस बात की पुष्टि केन्द्रीय सतर्कता आयोग (CVC) की नयी रिपोर्ट से होती है. सीवीसी द्वारा हाल में संसद में पेश की गई वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार 2015 के मुकाबले 2016 में केंद्र सरकार के सरकारी विभागों के भ्रष्टाचार में 67 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गयी है. आयोग ने बताया की उसे 2015 में जहाँ 29838 शिकायते मिली जबकि 2016 में बढ़कर यह 49847 हो गयी.

रिपोर्ट में बताया गया की सबसे अधिक शिकायते रेलवे विभाग के कर्मचारियों के विरुद्ध मिली है. यही नही गृह मंत्रालय के अंतर्गत काम करने वाले कर्मचारियों के विरुद्ध भी 6513 शिकायते दर्ज की गयी है. इसी तरह बाकी विभागों के कर्मचारियों के खिलाफ भी भ्रष्टाचार की शिकायते मिली है. उधर केजरीवाल सरकार के बारे में आयोग ने बताया की इनके कार्यकाल में भ्रष्टाचार में 400 फीसदी की कमी ये है. जहाँ साल 2015 में भ्रष्टाचार की 5139 शिकायतें मिली वही 2016 में यह आंकड़ा घटकर 969 रह गया.

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