पुलिस की रहते जामिया में लगे ‘जय श्रीराम’ और ‘गोली मारो…’ के विवादित नारे

संशोधित नागरिकता कानून (Citizenship Amendment Act 2019) को लेकर मचे बवाल के बीच जामिया मिल्लिया इस्लामिया कैंपस के पास मंगलवार को फिर माहौल को सांप्रदायिक बनाने की कोशिश की गई। हाथ में तिरंगा लिए कुछ लोगों की भीड़ ने पुलिस की मौजूदगी में ‘देश के गद्दारों को, गोली मारो…’ के नारा लगाए।

प्रदर्शन कर रहे जामिया के छात्र हाफिज़ आजमी ने कहा, “भीड़ सुखदेव विहार की ओर से पुलिस की मौजूदगी में नारे लगाते हुए आईं। उन लोगों ने गेट नंबर- 1 पर रूककर ‘जय श्री राम और गोली मारो…’ के नारे लगाएं। भीड़ फिर नारे लगाते हुए सुखदेव विहार की ओर चली गई।”

प्रदर्शनकारी छात्रों ने कहा कि दिल्ली पुलिस दावा कर रही है कि उसने उन्हें सुरक्षा प्रदान की है और प्रदर्शन स्थल पर पुलिसकर्मी तैनात किए हैं, लेकिन नारेबाजी और गोलीबारी की घटनाएं रुक नहीं रही हैं।

जामिया की छात्रा आरिफा खान ने कहा कि ये भड़काऊ घटनाएं हैं जिनके तहत हिंदू कट्टरपंथी शाहीन बाग और जामिया के शांतिपूर्ण प्रदर्शन में बाधा डालने के लिए उग्र युवाओं के समूह को भेज रहे हैं। यदि प्रदर्शन आधारहीन हैं, जैसा कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह दावा कर रहे हैं, तो वे क्यों बार-बार इसका उल्लेख कर रहे हैं और उनके लोग प्रदर्शन स्थल पर उपद्रवी तत्वों को क्यों भेज रहे हैं?

बता दें कि 30 जनवरी और 2 फरवरी को फायरिंग की वारदात हुई थी जिसमें पत्रकारिता के एक छात्र शादाब फारूख को हाथ में गोली लग गई थी। इससे पहले 15 दिसंबर को जामिया कैंपस में हिंसा हुई थी जिसमें करीब 150 छात्र घायल हो गए थे।

घटना स्थल पर मौजूद जामिया नगर पुलिस ने कुछ मिनटों के लिए नारेबाजी करने वाले युवाओं को हिरासत में लिया। जामिया नगर पुलिस थाने के एक निरीक्षक ने बताया कि झड़प को टालने के लिए उन लोगों को तुरंत धरना स्थल से जाने के लिए कहा गया। उन्हें हिरासत में लेकर नजदीक के थाने ले जाया गया, जहां से बाद में उन्हें जाने दिया गया।

हालांकि छात्रों ने अपील करते हुए कहा, “हम लोगों से बड़ी संख्या में गेट नंबर 7 पर इकट्ठा होने का आग्रह करते हैं। जामिया में स्थिति को संभालने में दिल्ली पुलिस की भूमिका संदिग्ध है।”

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