जम्‍मू कश्‍मीर के त्राल में शनिवार को सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच करीब 15 घंटे का एनकाउंटर हुआ. इस एनकाउंट में कॉन्स्टेबल मंजूर अहमद नायक भी शहीद हो गए. लेकिन उन्होंने अपनी जान देकर आतंकियों का सफाया कर दिया.

इस एनकाउंटर में जम्‍मू कश्‍मीर पुलिस के कॉन्‍स्‍टेबल ने बहादुरी का जो नमूना पेश किया उसे सुनकर आपको उन पर गर्व होगा. पुलिस के मुताबिक सुरक्षाबलों को शनिवार शाम को त्राल में एक कारपेंटर के घर में दो आतंकियों के छिपे होने का इनपुट मिला था. इसके बाद पुलिस, सेना और सीआरपीएफ के जवानों ने घर का घेराव कर छापेमारी की. शाम को 6 बजे आतंकियों ने फायरिंग शुरू कर दी. रात के 9 बजे तक कोई सफलता नहीं मिली. तो सेना ने आतंकियों के छिपने वाली जगह को विस्फोट से उड़ाने का फैसला किया.

जब अधिकारियों ने पूछा कि जिस मकान में आतंकी छिपे हुए हैं वहां बम लगाने कौन जाएगा. तो मंजूर आगे आ गए. 15 मिनट बाद वो आतंकियों की गोलियों की बौछार के बीच अंधेरे में रेंगते हुए मकान तक पहुंच गए. और वहां बम बिछा दिया. लेकिन जब ब्लास्ट किया गया तो वो केवल आधा ही ब्लास्ट हुआ. ऐसे में फिर निराशा हाथ लगी. दो घंटे के अन्तराल के बाद फिर से विस्फोटक लगाया गया. इस बार भी विस्फोटक लगाने नायक ही पहुंचे.

लेकिन इन बार आतंकियों ने उन पर गोलियों की बौछार कर दी. बुरी तरह से जख्‍मी होने के बाद भी वह आगे बढ़ते रहे और घर के बचे हिस्‍से में विस्‍फोटक लगाकर ही उन्‍होंने दम लिया. इस बार उनके लगाए गए विस्‍फोटक से पूरा घर ब्लास्ट हो गया. लेकिन नायक शहीद हो गए.

एसपी अवंतीगोर ने मीडिया को बताया कि, “हमने उसे कहा था कि खतरा लेने की जरूरत नहीं है, जान की भी परवाह करो. तो उसने कहा कि कोई बात नहीं, ऐसा होता रहता है.”

नायक के घर में उनका चार वर्ष का बेटा है और उनकी पत्‍नी हैं जो गर्भवती हैं. उनके दो छोटे भाई हैं जो बेरोजगार हैं. नायक, उरी के इस्‍लामाबाद के रहने वाले थे.

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