नई दिल्ली । गुजरात विधानसभा चुनाव के दोनो चरणो का मतदान सम्पन्न हो चुका है। अब 18 दिसंबर को परिणाम घोषित किए जाएँगे। लेकिन परिणामों से पहले आए सभी एग्ज़िट पोल में दोबारा भाजपा की सरकार बनती दिख रही है। एग्ज़िट पोल के आँकड़ो से हैरान कांग्रेस को अब इस बात का डर सता रहा है की कही ईवीएम में कोई छेड़छाड़ न की गयी हो। इसलिए कांग्रेस ने शुक्रवार को सप्रीम कोर्ट में याचिका दाख़िल माँग की थी की मतगणना के दौरान वीवीपेट की पर्चियों का मिलान ईवीएम के साथ किया जाए।

लेकिन कोर्ट ने उनकी इस माँग को यह कहकर ख़ारिज कर दिया की वो चुनाव आयोग प्रक्रिया में दख़ल नही देगी। कोर्ट के फ़ैसले के बाद यह सवाल उठ रहा है की आख़िर मतदान के दौरान वीवीपेट लगाने का औचित्य क्या है? लोकतंत्र में अगर कोई सवाल उठ रहा है तो यह सम्बंधित विभाग का काम है की वो उस सवाल का जवाब दे और सभी संशय को दूर करे। अगर संशय वीवीपेट की पर्चियों के मिलान से दूर होता है तो इसमें कुछ बुराई भी नही है।

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हालाँकि कोर्ट कांग्रेस की माँग को ठुकरा चुका है फिर भी पार्टी हार मानने के लिए तैयार नही है। कांग्रेस जल्द ही कोर्ट में एक व्यापक याचिका डालने पर विचार कर रही है। कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने इस बारे में बताते हुए कहा,’ हम बहुत जल्द एक नई व्यापक याचिका दायर करने जा रहे हैं। कांग्रेस, हमारे संविधान के मूलभूत ढांचा, स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव के बारे में जागरूकता पैदा करने में अग्रिम मोर्चे पर रहेगी।’

सिंघवी ने आगे कहा कि पार्टी सबसे पहले चुनाव आयोग के पास जाएगी और इलेक्ट्रॉनिक नतीजे तथा पेपर ट्रेल नतीजे की तुलना करने की मांग करेगी। इसके बाद व्यापक चुनाव सुधार के लिए कोर्ट में याचिका दाख़िल करेंगे। फ़िलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है की अगर ईवीएम में छेड़छाड़ सम्भव नही है तो चुनाव आयोग को वीवीपेट की पर्चियों का मिलान करने में क्या परेशानी है? ख़ुद चुनाव आयोग को आगे आकार कहना चाहिए की वो इसके लिए तैयार है। अगर वह मना करता है तो फिर सवाल उठेंगे ही की आख़िर चुनाव आयोग क्या छुपाने की कोशिश कर रहा है।

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