Monday, September 27, 2021

 

 

 

1984 सिख विरोधी दंगों के दोषी कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को मिली उम्र कैद

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साल 1984 में सिख विरोधी दंगे में कांग्रेस के दिग्गज नेता सज्जन कुमार को दिल्ली हाईकोर्ट ने दोषी करार देते हुए उम्र कैद की सज़ा सुनाई।  उन्हें 31 दिसंबर तक सरेंडर करने का आदेश दिया गया है।

सज्जन को आपराधिक साजिश और दंगा भड़काने का दोषी पाया गया। निचली अदालत ने 30 अप्रैल 2013 को उन्हें बरी कर दिया था। इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ केंद्रीय जाँच ब्यूरो यानी सीबीआई ने दिल्ली हाईकोर्ट में अपील की थी। इसके अलावा, कैप्टन भागमल, पूर्व पार्षद बलवान यादव और गिरधारी लाल को भी उम्र क़ैद की सज़ा सुनाई गई है।

जस्टिस एस मुरलीधर और जस्टिस विनोद गोयल की बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा, ‘‘1947 में बंटवारे के वक्त कई लोगों का कत्लेआम किया गया था। इसके 37 साल बाद दिल्ली ऐसी ही त्रासदी की गवाह बनी। आरोपी राजनीतिक संरक्षण का फायदा उठाकर सुनवाई से बच निकले।’’

पिछले महीने पटियाला हाउस कोर्ट में मामले की एक गवाह चाम कौर ने सज्जन को पहचान लिया था। चाम ने बयान दिया था- घटनास्थल पर मौजूद सज्जन ने वहां मौजूद दंगाइयों से कहा था कि सिखों ने हमारी मां (इंदिरा गांधी) का कत्ल किया है, इसलिए इन्हें नहीं छोड़ना। बाद में भीड़ ने उकसावे में आकर मेरे बेटे और पिता का कत्ल कर दिया।

इस मामले में एक पीड़िता निरप्रीत कौर ने फ़ैसले के बाद कहा, “मैं जज साहब की शुक्रगुज़ार हूँ। और उस पूरी टीम का धन्यावाद करती हूं कि जिसने ये केस लड़ा। काश ! ये पहले हो जाता तो मेरी इतनी दुर्गति नहीं होती। जो मैंने खोया, वो मैं खोती नहीं. मैं उम्रक़ैद की सज़ा से संतुष्ट हूँ। फांसी की सजा में वो एक बार लटक कर मर जाता लेकिन अब तड़प-तड़प कर मरेगा।”

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि सिख दंगों का पाप कांग्रेस पार्टी से कभी नहीं हट सकता, अब तो उनको सज़ा होनी चाहिए जिन्होंने भीड़ को दंगों के लिए उकसाया था।

जेटली ने कहा, “हम इस फ़ैसले का स्वागत करते हैं. 1984 में सिख दंगों में कांग्रेस नेता दंगाई भीड़ का नेतृत्व कर रहे थे। कांग्रेस के शासन में जाँच आयोग बिठाए, उसमें कांग्रेस नेताओं को छोड़ दिया गया। पहली बार अटल बिहारी वाजपेयी के शासन में नानावटी आयोग बनाया। इस आयोग ने पुलिस थानों के हिसाब से रिपोर्ट तैयार की। फिर 2014 में नरेंद्र मोदी सरकार ने एसआईटी बनाई।”

केंद्रीय मंत्री और अकाली नेता हरसिमरत कोर बादल ने कहा, ‘‘मैं प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद देना चाहती हूं कि उन्होंने शिरोमणी अकाली दल की गुजारिश पर 2015 में 1984 दंगाें की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया। यह ऐतिहासिक फैसला है। आखिरकार इंसाफ का पहिया घूम गया।’’

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