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कर्नाटक में सियासी घमासान के बीच महज ढाई दिन में येदुरप्पा की बीजेपी सरकार गिर गई है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बीजेपी अपना बहुमत साबित नहीं कर पाई. ऐसे में येदुरप्पा ने फ्लोर टेस्ट से पहले ही अपने पद से इस्तीफा दे दिया.

बता दें कि 221 सीटों में से बीजेपी को 104, कांग्रेस को 78, जेडीएस को 36 और अन्य के पास 3 सीटें है. जबकि बहुमत के लिए 111 विधायकों की आवश्यकता है. ऐसे में कांग्रेस और जेडीएस के गठबंधन से ये आकड़ा पूरा हो रहा है.

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कांग्रेस की रणनीति आई काम

विधान सभा चुनाव के नतीजों के आने के साथ ही कांग्रेस ने अपने विधायकों पर पूरी पकड़ बनाए रखी हुई थी. नतीजे आने के साथ ही कांग्रेस ने अपने विधायकों से हस्ताक्षर करा लिए. इसके बाद सभी विधायकों को अपनी निगरानी में हैदराबाद पहुंचाया.

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ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ही कांग्रेस ने अपने विधायकों को हैदराबाद से दूसरे दिन ही बेंगलुरु वापस बुलाया. सदन में ले जाने से पहले बाकायदा उनकी क्लास ली गई. उन्हें पहले ही समझा दिया गया था कि कोई भी विधायक किसी भी बीजेपी नेता कोई बातचीत नहीं करेगा. साथ ही बीजेपी नेता के उकसाने पर किसी तरह को कोई रिएक्ट नहीं करना है और न ही उनसे लड़ना है.

इसके अलावा उन्हें ये भी आदेश दिया गया था कि सदन की कार्यवाही स्थागित होने पर विधानसभा नहीं छोड़नी है. सदन में ही रहना है. ऐसे में सभी विधायकों को कांग्रेस ने लंच के दौरान बाहर नहीं निकलने दिया. उनकी जगह पर ही उन्हें खाने के पैकेट उपलब्ध कराए गए. ऐसे में बीजेपी चाहकर भी कांग्रेसी विधायकों से संपर्क नहीं कर पाई.

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