Tuesday, October 26, 2021

 

 

 

मुस्लिम स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइज़ेशन का सम्मेलन समाप्त, शुजात क़ादरी राष्ट्रीय अध्यक्ष तो हमदानी बने राष्ट्रीय महासचिव

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नई दिल्ली। भारत के सबसे बड़े मुस्लिम छात्र संगठन मुस्लिम स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ इंडिया का दो दिन का राष्ट्रीय सम्मेलन यहाँ समाप्त हो गया। हर दो वर्ष में एक बार होने वाले प्रतिनिधि सम्मेलन में संगठन के चुनाव होते हैं। अगले दो वर्षों के लिए शुजात क़ादरी राष्ट्रीय अध्यक्ष होंगे जबकि अब्दुल क़ादिर हमदानी राष्ट्रीय महासचिव बनाए गए हैं।

यहाँ पत्रकारों से बातचीत में शुजात ने बताया कि देश के सबसे बड़े मुस्लिम छात्र संगठन मुस्लिम स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ इंडिया का द्विवार्षिक प्रतिनिधि सम्मेलन सांगठिन चुनाव के लिए आयोजित करवाया जाता है। इसमें संगठन के सभी 22 राज्यों के चयनित प्रतिनिधि ही राष्ट्रीय कार्यकारिणी का चुनाव करते हैं। इसके तहत सम्पन्न चुनावों में राष्ट्रीय अध्यक्ष और राष्ट्रीय महासचिव का चुनाव काफ़ी अहम है। नई दिल्ली स्थित इंडिया इस्लामिक सेंटर में आयोजित इस कार्यक्रम में देश भर से क़रीब 150 प्रतिभागियों ने एकल संक्रमणीय मत प्रणाली के आधार पर वोट डाला और कार्यकारिणी का चुनाव किया गया।

एमएसओ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी

चुनाव के बाद चुन कर आई राष्ट्रीय कार्यकारिणी में अब शुजात क़ादरी राष्ट्रीय अध्यक्ष, गुजरात के अब्दुल क़ादिर हमदानी राष्ट्रीय महासचिव, राजस्थान के डॉ. इदरीस नूरी, दिल्ली के शाहबाज़ मिस्बाही और उत्तर प्रदेश के अनीश शिराज़ी उपाध्यक्ष चुने गए हैं। सचिव पद के लिए त्रिपुरा के नज़रुल इस्लाम, तेलंगाना के ज़ीशान रिज़वी, कर्नाटक के ख़ुर्शीद शेख़ चुने गए, कोषाध्यक्ष आमिर तहसीनी, कैम्पस सचिव अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के हसन मुबारक इश्क़ी चुने गए। राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य के रूप में देश भर के विभिन्न राज्यों से 15 सदस्यों का चुनाव किया गया। चुनाव के बेहतर संचालन के लिए एमएसओ दिल्ली प्रदेश युनिट का सभी ने तहे दिल से शुक्रिया अदा किया।

कश्मीर पर विशेष ज़ोर

मुस्लिम स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ इंडिया यानी एमएसओ ने संगठन चुनाव के दौरान कश्मीर में युवाओं को रोज़गार, शिक्षा और मुख्यधारा में लाए जाने के लिए चर्चा की। संगठन का मानना है कि विदेशी धन और ख़ौफ़ के माहौल में कश्मीर के युवाओं की परिस्थिति काफ़ी जटिल हो गई है और इसे ठीक करने के लिए मुस्लिम स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ इंडिया यानी एमएसओ अपनी सेवा देने के लिए तैयार है। नवनिर्वाचित अध्यक्ष शुजात क़ादरी ने कहाकि कश्मीर में युवाओं के करियर गाइडेंस कैम्प और शिक्षा के बेहतर माहौल के लिए एक प्रतिनिधि मंडल को ग्राउंड पर शोध करके रिपोर्ट देने के लिए नियुक्त किया गया है।

छात्र हित पर चर्चा

अधिवेशन के दूसरे दिन छात्र हितों पर चर्चा की गई। राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान एनसीएमईआई की कार्यप्रणाली पर चर्चा करते हुए सभी ने एक राय में इसकी प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए सरकार पर दबाव डालने की राय दी। छात्रों की राय में एनसीएमईआई संगठन को अधिक स्वायत्त बनाए जाने की माँग की गई। संगठन के नवनिर्वाचित महासचिव अब्दुल क़ादिर हमदानी ने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक वित्त विकास निगम की ऋण शर्तों को आसान बनाए जाने पर बल देते हुए इसे नवरोज़गार के लिए उन्मुक्त किए जाने पर बल दिया।

हज नीति में छेड़छाड़ नहीं

छात्रों ने नई हज नीति को शरीअत में दख़ल मानते हुए इसे तत्काल वापस लिए जाने की माँग की गई। हालांकि सऊदी अरब सरकार की तरफ़ से इस बात की पुष्टि नहीं की गई है कि बिना पुरुष साथी (मेहरम) के हज पर गई महिला को वीज़ा दिया जाएगा या नहीं। मुस्लिम स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ इंडिया यानी एमएसओ ने हज नीति में बदलाव और प्रतिक्रिया को राजनीति मानते हुए इसे लोकतंत्र के लिए घातक बताया। एमएसओ ने माँग की कि यदि वाकई सरकार हाजियों की मदद करना चाहती है तो हाजियों के हवाई टिकट उन्हें स्वयं बनाने की स्वतंत्रता दी जानी चाहिए। आवश्यकता भ्रष्टाचार दूर करने की है ना कि हाजियों को लूटकर एयर इंडिया के घाटे को उभारने की।

नजीब पर हुई चर्चा

अपने दो दिन का स्मेमलन के दौरान मुस्लिम स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ इंडिया यानी एमएसओ ने कई राष्ट्रीय मसलों पर चर्चा की। नवनिर्वाचित राष्ट्रीय अध्यक्ष शुजात क़ादरी ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पिछले एक वर्ष से अधिक समय से लापता छात्र नजीब की गुमशुदगी को गंभीर मसला बताते हुए इसे राष्ट्रीय समस्या बताया। शुजात ने कहाकि नजीब का लापता होना सरकार के युवाओं के प्रति असंवेदनशीलता का परिचय है और जो लोग मुस्लिम लड़के के नाम पर हमारे साथ नहीं आ रहे थे उन्हें सभी विश्वविद्यालयों में छात्रों के उत्पीड़न के बाद अहसास हो गया है कि केन्द्र की भारतीय जनता पार्टी की सरकार विद्यार्थियों के साथ मज़ाक कर रही है। उन्होंने इस मसले पर फौरन गंभीरता से कार्य किए जाने की ज़रूरत पर बल दिया।

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