Sunday, January 23, 2022

कश्मीरी नेताओं को रिहाई के 370 के खिलाफ एक साल तक रखना होगा मुंह बंद

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अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से नजरबंदी झेल रहे कश्मीरी नेताओं को अपनी रिहाई को लेकर एक बॉन्ड पर दस्तखत करना पड़ रहा है। लेकिन इस बॉन्ड पर शर्त है कि रिहाई के एक साल तक वे अनुच्छेद 370 के खात्मे के खिलाफ मुंह नहीं खोल सकते।

बता दें कि सरकार ने बॉन्ड पेपर के तथ्यों में बदलाव किया है। अपराध दंड विधान संहिता (सीआरपीसी) की धारा 107 के मुताबिक जिलाधिकारी को इसका संवैधानिक अधिकार है कि जिले में शांति-व्यवस्था कायम रखने के लिए किसी भी शख्स से, जिससे उपद्रव होने की आशंका हो, इस तरह के बॉन्ड भरवा सकता है।

बॉन्ड में पहले हस्ताक्षरी से वचन लिया जाता था कि वो शांति का उल्लंघन नहीं करेगा या ऐसी किसी भी हरकत को अंजाम नहीं देगा जो शायद शांति का उल्लंघन हो सकता है। इस वादे का उल्लंघन करने पर हस्ताक्षरी द्वारा भरे गए मुचलके की राशि को राज्य सरकार जब्त कर सकती है।

‘द टेलीग्राफ’ के मुताबिक बदले हुए और संशोधित बॉन्ड में अब सरकार यह लिखवा रही है कि हस्ताक्षरकर्ता, वर्तमान समय में जम्मू और कश्मीर राज्य में हाल की घटनाओं से संबंधित न तो कहीं कोई टिप्पणी करेगा, न ही सार्वजनिक सभा (सभाओं) में कोई बयान देगा या न ही सार्वजनिक भाषण देगा और न ही सार्वजनिक सभा करेगा क्योंकि इसमें राज्य और किसी भी हिस्से में एक साल की अवधि के लिए शांति और कानून-व्यवस्था को खतरे में डालने की क्षमता है।

बॉन्ड के दूसरे भाग में कहा गया है कि हस्ताक्षरी को “ज़मानत” के रूप में 10,000 रुपये जमा करने होंगे और बांड के किसी भी उल्लंघन के लिए 40,000 रुपये “ज़मानत” के रूप में चुकाने होंगे। इस बॉन्ड का उल्लंघन करने पर फिर से हस्ताक्षरी को नए सिरे से नजरबंद किया जा सकता है। बॉन्ड में हाल की घटनाओं से साफ मतलब अनुच्छेद 370 को हटाए जाने और राज्य के बंटवारे से है।

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