Tuesday, May 18, 2021

750 सालों से दरगाह पर खिल रहा है बसंत का रंग

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नई दिल्ली शुक्रवार को एक तरफ जहां मध्य प्रदेश के धार जिले के भोजशाला में बसंत पंचमी और जुमे की नमाज एक साथ कराने को लेकर प्रशासन को खासी मशक्कत करनी पड़ रही थी। वहीं, दिल्ली की हजरत निजामुद्दीन औलिया की दरगाह में धूमधाम से बसंत मनाने की तैयारियां चल रही थीं। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि हर साल हजरत अमीर खुसरो और निजामुद्दीन औलिया की दरगाह पर बसंत मनाया जाता है। पीले फूल, पीले कपड़े और पीली सरसों से दरगाह का हर हिस्सा रंगा दिखाई देता है।

 पीले फूल से सजती है दरगाहहिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, हर धर्म के लोग एक साथ इस त्योहार को मनाने के लिए दरगाह पर इकट्ठे होते हैं। धर्म की कोई दीवार यहां नजर नहीं आती। बसंत का यह खास रंग आज दरगाह पर दिखाई देगा। दरगाह के चीफ इंचार्ज सैयद अफसर अली निजामी ने बताया कि पिछले करीब 750 सालों से यह सिलसिला चला आ रहा है। हजरत अमीर खुसरो ने इसकी शुरुआत की थी। इस दिन दरगाह पर हाजिरी देने वाले सारे कव्वाल इकट्‌ठे होते हैं और दरगाह के बावली गेट से खास कव्वाली गाते हुए पहले हजरत अमीर खुसरो की दरगाह पर हाजिरी देते हैं और फिर हजरत निजामुद्दीन औलिया की दरगाह पर पहुंचते हैं।

पूरे साल में यह इकलौता ऐसा मौका होता है जब दरगाह के अंदर कव्वाली पेश की जाती है। इसके बाद सभी कव्वाल मिलकर दरगाह के सामने बैठकर कव्वाली पेश करते हैं। उन्होंने बताया कि इस दिन पूरा दरगाह कैंपस बसंत के पीले रंग में रंग जाता है। लोग पीले कपड़े पहनकर यहां हाजिरी देने आते हैं और पीले फूल, पीली चादर और पीली सरसों को दरगाह पर चढ़ाया जाता है। उन्होंने बताया वैसे तो दरगाह के दरवाजे हमेशा ही सबके लिए खुले रहते हैं लेकिन इस दिन खासतौर पर यह संदेश दुनिया में जाता है कि हजरत निजामुद्दीन औलिया की दरगाह पर हर धर्म को मानने वाला शख्स समान है। यहां हर धर्म के और हर देश के लोगों के लिए दुआ की जाती है।

कव्वाल चांद निजामी बताते हैं कि राग बहार और बसंत बहार में इस दिन खास कलाम पेश किए जाते हैं। हजरत अमीर खुसरो ने इस दिन के लिए खास तराने बनाए थे, इन्हें भी इस दिन खासतौर पर सभी कव्वाल एक साथ मिलकर पेश करते हैं। करीब 50 कव्वाल इस दिन इकट्‌ठे होते हैं। आज शाम 4 बजे के बाद से ये रस्में दरगाह पर शुरू हो जाएंगी। उन्होंने बताया कि हर साल बसंत की यह रस्म हजरत निजामुद्दीन औलिया के दरगाह से शुरू होती है और उसके बाद देशभर की खानकाहों तक पहुंचती है। (नवभारत टाइम्स)

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