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नई दिल्ली : बुलंदशहर में गौरक्षा के नाम पर हिंदुवादियों के हाथो शहीद हुए स्याना के थाना प्रभारी इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह की मौत को लेकर पहले ही बवाल मचा हुआ है। अब उनसे जुड़ा एक और विडियो सामने आया है। जिसमे दादरी कांड को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है।

कोबारपोस्ट के स्टिंग के अनुसार, जब दादरी के बिसाहड़ा में अखलाक हत्याकांड हुआ था, उस समय यही सुबोध कुमार थाना प्रभारी थे और उन पर मीट सैंपल चेंज करने का दवाब बनाया गया था। ये स्टिंग के वीडियो में साफ़ देखा जा सकता है।

कोबरापोस्ट का कहना है कि उसका यह खुलासा उनकी उस तहक़ीक़ात का हिस्सा है जो उन्होंने कई महीने पहले देश में गाय के नाम पर हो रही हत्याओं पर शुरू की थी। इसके लिए उनके रिपोर्टर उमेश पाटिल और असित दीक्षित ने फिल्म रिसर्चर के रूप में सुबोध कुमार सिंह से मुलाक़ात की थी। किसी कारण कोबरापोस्ट की वह तहक़ीक़ात पूरी न हो सकी। कोबरा पोस्ट का ये भी कहना है कि इस ताजा खुलासे के पीछे एकमात्र उद्देश्य है कि सुबोध कुमार सिंह के साथ हुई नाइंसाफी की सच्चाई जग-जाहिर हो सके।

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2015 में हुए इस हत्याकांड के समय सुबोध कुमार जारछा थाने के एसएचओ थे। अख़लाक़ अहमद का गांव इसी थानाक्षेत्र में आता है। अख़लाक़ के भाई जान मोहम्मद ने बीबीसी को बताया, “सुबोध कुमार ही सबसे पहले घटनास्थल पर पहुंचे थे. उन्होंने ही अख़लाक़ और उनके बेटे दानिश ख़ान को अस्पताल पहुंचाया था।”

यूपी पुलिस के एडीजी क़ानून व्यवस्था आनंद कुमार के मुताबिक़ सुबोध कुमार सिंह 28 सितंबर 2015 से 09 नवंबर 2015 तक अखलाक़ लिंचिंग केस के जांच अधिकारी थे, लेकिन इस मामले में चार्जशीट उन्होंने दाख़िल नहीं की थी।

जान मोहम्मद के मुताबिक़ इस मामले में पहली गिरफ़्तारियां सुबोध कुमार और उनकी टीम ने ही की थी। आनंद कुमार के मुताबिक़ बाद में सुबोध कुमार तबादला कर दिया गया था और एक दूसरे अधिकारी ने मामले में चार्जशीट दाख़िल की थी। हालांकि आनंद कुमार ने उनके तबादले की वजह नहीं बतायी।

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