लखनऊ | उत्तर प्रदेश में सत्ता बदलते ही रंगों पर सियासत भी शुरू हो गयी. चूँकि यूपी में अब बीजेपी की सरकार है इसलिए पुरे प्रदेश में भगवा रंग की अहमियत भी बढ़ गयी है. इसलिए उन सभी चीजो पर अब भगवा रंग चढाने की तैयारी की जा रही है जहाँ पर पूर्व की सरकारों ने अपने रंग चढ़ा दिए थे. इसकी शुरुआत मुख्यमंत्री की कुर्सी पर भगवा रंग का तौलिया रखने से हो चुकी है. इसके बाद अस्पतालों में चादरों का रंग भी भगवा कर दिया गया.

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अब राज्य सरकार की बसों की बारी है. मिली जानकारी के अनुसार राज्य सरकार ने सभी रोडवेज बसों को भगवा रंग में रंगने के आदेश दिए है. आदेश मिलते ही इस पर काम भी शुरू हो गया. कुछ जगह पर बसों के रंग भगवा और सफ़ेद कर दिए गए. हालाँकि प्रदेश में यह काम पहली बार नही हो रहा है. बसपा की सरकार के समय सभी रोडवेज बसों को नीले रंग में रंग जा चूका है जो अखिलेश सरकार बनने के बाद बदल दिया गया.

अखिलेश यादव ने भी सभी रोडवेज बसों को लाल और हरे रंग में रंगवाने का काम किया था. इसलिए उत्तर प्रदेश की यह एक परिपाटी बन चुकी है. जिस पार्टी की सरकार, रोडवेज बस भी उसी रंग में रंगी जायेंगी. इसलिए उत्तर प्रदेश में यह पता लगाना मुश्किल नही है की यहाँ किस पार्टी की सरकार है. वैसे इस तरह के आदेश से जनता को शायद ही कोई भला हो लेकिन सरकारी खजानों पर जरुर इसका असर पड़ता है.

परिवहन निगम अधिकारियों के मुताबिक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 25 सितम्बर को पंडित दीन दयाल उपाध्याय के जन्म दिन पर भगवा रंग में रंगी रोडवेज बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे. अभी तक इस बात की जानकारी नही मिली है की प्रदेश की सभी बसों को भगवा करने में सरकार का कितना खर्चा आएगा. लेकिन लोग सवाल उठा सकते है की जिस प्रदेश में ऑक्सीजन की कमी से बच्चो की मौत हो जाती है वहां इस तरह के आदेश जनता का क्या भला करेंगे.

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