लखनऊ | 8 मार्च को 11 घंटे की मुठभेड़ के बाद मारे गए संदिग्ध आतंकी सैफुल्ला मामले की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए गए है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को इसके आदेश दिए. लखनऊ एसडीएम (सदर) संजय पांडेय मामले की जाँच करेंगे. हालाँकि सैफुल्ला के परिजनों की और से किसी भी जांच की मांग नही की गयी थी.

बीते महीने मध्य प्रदेश के शाजापुर में भोपाल पैसेंजर ट्रेन में एक ब्लास्ट हुआ था. जिसमे 10 लोग घायल हो गए थे. जांच में पता चला की विस्फोट आईईडी के जरिये किये गया था. इसी दिन मध्य प्रदेश एटीएस ने तत्परता दिखाते हुए पिपरिया में एक बस से चार संदिग्धों को गिरफ्तार किया. इनकी निशानदेही पर उत्तर प्रदेश के कानपूर और इटावा से भी कुछ गिरफ्तारिया हुई.

कानपुर से दो तो इटावा से एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया. गिरफ्तार किये गए संदिग्धों के इनपुट पर उत्तर प्रदेश एटीएस ने लखनऊ के एक घर पर धावा बोल दिया. एटीएस को इनपुट मिला था की यहाँ आईएसआईएस का एक संदिग्ध आतंकी सैफुल्ला छुपा हुआ है. पकडे गए सभी संदिग्धों से यह भी जानकारी मिली की ये सभी आईएसआईएस के खुरासान ग्रुप से भी जुड़े हुए है.

शुरुआती समय में यूपी एटीएस ने सैफुल्ला को सरेंडर करने के लिए कहा लेकिन उसने मना कर दिया. यही नही एटीएस ने सैफुल्ला से उसके भाई की भी बात कराई लेकिन उसने स्पष्ट किया की वो जान देना पसंद करेगा लेकिन सरेंडर नही करेगा. अंतिम समय तक एटीएस चीफ कहते रहे की उनकी पूरी कोशिश सैफुल्ला को जीवित पकडने की है. लेकिन रात के करीब 3 बजे , मुठभेड़ में सैफुल्ला को मार गिराया गया. हालाँकि युपी एडीजे दलजीत चौधरी ने स्पष्ट किया की एटीएस को ऐसा कोई सबूत नही मिला जिससे स्पष्ट हो की सैफुल्ला का ISIS के साथ कोई कनेक्शन था.

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