जेलों में बंद कैदियों की दुर्दशा के मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की मोदी सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। दरअसल एटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने जस्टिस मदन बी लोकुर की खंडपीठ में कहा कि अदालतें पर्यावरण, प्रदूषण और कूड़ा जैसे मुद्दों को लेकर दाखिल की जाने वाली पीआईएल पर आदेश जारी कर देती है, जबकि सरकार के पास संसाधन कम हैं और उसे कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

इस पर जस्टिस मदन बी लोकुर ने कहा कि हमने भी बहुत सी ऐसी चीज़ें देखी हैं जिससे देश मे तमाम समस्याओं के समाधान के लिए आवंटित बजट का इस्तेमाल तक नहीं किया गया। कोर्ट ने कहा कि प्रदूषण, पर्यावरण और कचरे की समस्या इतनी विकराल है कि इनको दरकिनार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि देश में गरीबी का आलम और सरकार के बजट खर्च करने के ये हालत है कि एक ओर तो लोगों के पास पहनने को कपड़ा और शिक्षा का बुनियादी इंतज़ाम तक नहीं है, लेकिन सरकार जनता को वाशिंग मशीन और लैपटॉप बांट रही है। क्या ये बजट का सही इस्तेमाल है?

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि देश में कई संस्थान ऐसे हैं जिनकी देखरेख के लिए हमने कमेटी बनाकर काम तेजी से आगे बढ़ाने को कहा पर हुआ कुछ नहीं। कोर्ट ने कहा कि मनरेगा, विधवाओं का पुनर्वास और जेलों में बंद महिला कैदियों के बच्चों की दुर्दशा पर सरकार को पहले ही समय रहते काम करना चाहिए था। कोर्ट ने कहा कि हम अनुच्छेद 21 के तहत हर नागरिक के गरिमापूर्ण ढंग से जीने के अधिकार की रक्षा में जुटे हैं। हमने ऐसे कई मामलों में सरकार से अतिरिक्त धन आवंटन के आदेश भी दिए।

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इस दौरान अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल केके वेणुगोपाल ने कहा, हर दिन मैं आपके टिप्पणियों को पढ़ता हूं। लेकिन एक जज सभी समस्याओं के सभी पहलुओं को नहीं जानता है। अटॉर्नी जनरल ने कहा कि किसी भी PIL पर फैसला सुनाने के दौरान जजों को दूसरों के अधिकारों का भी ख्याल रखना चाहिए। वेणुगोपाल ने बेंच को कहा कि अदालत द्वारा 2 जी लाइसेंस रद्द करने से बड़े विदेशी निवेश में कमी आई है। उन्होंने कहा, इसी तरह, हाईवे से शराब के ठेके हटाने के आदेश से भारी वित्तीय नुकसान हुआ. लोगों के रोज़गार खत्म हो गए।

वेणुगोपाल ने कहा कि उनकी राय में, पीआईएल के हर आदेश में ये भी लिखा होना चाहिए कि ऐसे आदेशों से क्या प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा “मेरी राय में, सभी पीआईएल इस तरह से तय किए जाने चाहिए। हर आदेश के बारे में संतुलित हो कर सोचना चाहिए। भारत में कई समस्याएं हैं। गरीबी, निरक्षरता, गंभीर समस्यों पर जागरूकता की कमी। सरकार को पहले ऐसे लोगों को देखना होता है जो हर दिन सिर्फ 100 रुपये कमाते हैं।”

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