Wednesday, August 4, 2021

 

 

 

UAPA से दो मुस्लिम युवा बरी, जिंदगी के कीमती 9 साल जेल में बिताए

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महाराष्ट्र के नांदेड़ से 2012 में UAPA के तहत गिरफ्तार किए गए मोहम्मद इलियास (38) और मोहम्मद इरफान (33) को मंगलवार देर रात रिहा कर दिया गया। दोनों को अदालत ने  गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम सहित सभी आरोपों से बरी कर दिया।

दोनों बुधवार को अपने घर नांदेड़ के लिए निकले। इरफ़ान ने कहा, “बस, नौ साल जो गए, सब हवा में।” इलियास और इरफान को महाराष्ट्र एटीएस ने 31 अगस्त 2012 को नांदेड़ से गिरफ्तार किया था। उनके साथ तीन अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया गया था। इन पर हिंदू नेताओं और पत्रकारों की हत्या की साजिश रचने का आरोप था।

इस मामले में बाद में नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी ने जांच की। मंगलवार को मुंबई की विशेष एनआईए अदालत ने तीन अन्य – मोहम्मद अकरम, मोहम्मद मुजम्मिल और मोहम्मद सादिक को यूएपीए और आर्म्स एक्ट के तहत दोषी ठहराया और उन्हें 10 साल की सजा सुनाई।

अदालत ने इरफान और इलियास को यह कहते हुए बरी कर दिया कि उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं है। गिरफ्तार होने से पहले इलियास का नांदेड़ में फलों का कारोबार था जबकि इरफान की खुद की इन्वर्टर की बैटरी की दुकान थी। पिछले नौ वर्षों में उन्होने कई जमानत के आवेदन किए। इस दौरान न तो एटीएस और न ही एनआईए ने उनके खिलाफ कोई सबूत पेश किया।

इलियास ने कहा कि उन्होंने कम से कम चार जमानत आवेदन दायर किए, लेकिन हर बार खारिज कर दिया गया। इरफान के मामले में, 2019 में उम्मीद की एक किरण दिखाई दी, जब बॉम्बे हाईकोर्ट ने यह कहते हुए जमानत दे दी कि प्रथम दृष्टया, यह मानने का कोई उचित आधार नहीं है कि उनके खिलाफ आरोप सही थे।

हालांकि, उच्चतम न्यायालय द्वारा एनआईए की इस दलील के बाद कि “अपराध की पुनरावृत्ति की संभावना है जो राष्ट्र की सुरक्षा को प्रभावित कर सकती है, उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगाने के बाद, इरफ़ान चार महीने के भीतर वापस जेल में आ गया”।

इरफान ने 4 दिसंबर 2019 को निचली अदालत के सामने आत्मसमर्पण कर दिया और कल रात रिहा होने तक जेल में रहे। “मैं चार महीने से जमानत पर बाहर था। मैं अपने जीवन को फिर से पटरी पर लाने की कोशिश कर रहा था। मुझे उम्मीद थी कि मुझे फिर कभी जेल नहीं जाना पड़ेगा। आत्मसमर्पण करने के बाद मैंने जो 18 महीने जेल में बिताए, वे पिछले सात वर्षों की तुलना में अधिक कठिन थे।”

इरफान के अनुसार, एटीएस ने जिस एकमात्र लिंक का हवाला दिया, वह उनके और एक अन्य आरोपी मोहम्मद मुजम्मिल के बीच फोन कॉल थे। मुजम्मिल की इरफान की दुकान के पास ऑटोपार्ट्स की दुकान थी।

इलियास ने कहा कि उनका बरी होना कोई आश्चर्य की बात नहीं है क्योंकि उन्हें पता था कि उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं है। “मेरी गिरफ्तारी के बाद, मेरे व्यवसाय को बंद करना पड़ा क्योंकि मकान मालिक ने हमें परिसर खाली करने के लिए कहा था। यह जानते हुए भी कि मेरे खिलाफ मामला कमजोर है, मैं उच्च न्यायालयों में अपनी जमानत याचिकाओं पर अनुवर्ती कार्रवाई नहीं कर सका, क्योंकि मेरे पास कानूनी या वित्तीय क्षमता नहीं थी। अगर मुझे पहले जमानत दे दी जाती तो मेरे खिलाफ कोई सबूत न होने के बावजूद मेरी जिंदगी के इतने साल नहीं गंवाए जाते।

इलियास ने कहा कि जब उन्हें गिरफ्तार किया गया, तो उनका सबसे छोटा बच्चा सिर्फ दो सप्ताह से अधिक का था। पिछले नौ वर्षों में, वह 2017 में तलोजा जेल में केवल एक बार अपनी पत्नी और तीन बच्चों से मिले।

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