रामलला के पक्षकार से CJI बोले – मामला आस्था का नहीं बल्कि जमीन का, पुराणो को न सुनाए….

6:37 pm Published by:-Hindi News

नई दिल्ली. अयोध्या मामले पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट की 5 सदस्यीय बेंच ने 9वें दिन सुनवाई की। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने रामलला के पक्षकार सीएस वैद्यनाथन ने दलील दी कि लोगों की आस्था ही यह साबित करने के लिए काफी है कि विवादित जगह राम जन्मभूमि है, फिर भले ही वहां मंदिर रहा हो या नहीं।

ऐसे में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने रामजन्म स्थान पुनरुद्धार समिति के वकील से कहा कि वह इस मामले में पुख्ता सबूत पेश करें और पुराणों का जिक्र ना करें। क्योंकि ये मामला किसी आस्था का नहीं है बल्कि विवादित जमीन से जुड़ा है।

मिश्रा ने आइन-ए-अकबरी की बातों को बताया और कहा कि उन्होंने कहीं भी ये नहीं बताया कि बाबर ने मस्जिद बनाई थी। इस पर जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि मस्जिद किसने बनाई ये मायने नहीं रखता है, चाहे वो बाबर हो या अकबर, सवाल ये है कि वहां पर मस्जिद थी या नहीं।

babri masjid

इसके बाद चीफ जस्टिस ने कहा कि आप अपने सभी नोट्स को इकट्ठा करें और उन डॉक्यूमेंट्स को हमें दें जिनका आप जिक्र कर रहे हैं। इसके बाद पीएन मिश्रा ने कहा कि वह परसों अपनी दलील रखना चाहेंगे।

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि उन्हें कुछ पुख्ता सबूत चाहिए. हमें नक्शा दिखाएं या कुछ ऐसा दिखाइए कि जिससे पता लग सके कि आप जिस स्थान का दावा कर रहे हैं वो वही जगह है। चीफ जस्टिस ने कहा कि धर्मग्रंथों का इस वक्त मामले से लेना-देना नहीं है क्योंकि सवाल आस्था का नहीं बल्कि जमीन का है।

रामलला के वकील की तरफ से स्कन्द पुराण और अन्य पुराणों का जिक्र किया गया और रामजन्मभूमि के सबूतों को सामने रखा गया। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने वकील से पूछा कि क्या आपको पता है कि ये कब लिखा गया था। जिसपर वकील ने बताया कि ये गुप्त वंश के दौरान लिखा गया था।

जस्टिस चंद्रचूड़ ने इस दौरान कहा कि अगर आप अपनी जिरह के लिए पौराणिक तथ्यों का जिक्र कर रहे हैं, तो इस बात का भी ध्यान रखें कि मंदिर की मौजूदगी के लिए आपके पास कुछ अन्य सबूत भी हों। जस्टिस भूषण ने भी इस दौरान कहा कि आपको इन पुराणों के समय के बारे में भी बताना होगा क्योंकि आप उस जगह के लिए इनपर ही निर्भर हैं।

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