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नई दिल्ली | केंद्रीय सूचना आयोग ने गृह मंत्रालय को फटकार लगाते हुए पूछा है कि नवाब मीर बरकत अली खान को हैदराबाद राज्य के शासक के तौर पर मान्यता देने से जुड़ा 50 साल पुराना रिकॉर्ड माँगा है.

आयोग ने गृह मंत्रालय से पूछा कि नवाब मीर बरकत अली खान को ‘हैदराबाद राज्य के शासक’ के रूप में मान्यता प्रदान करने वाले सारे दस्तावेज कहां हैं? दरअसल, गृह मंत्रालय ने कहा था कि उसे इस अहम फाइल के बारे में जानकारी नहीं है.

इसके अलावा सूचना आयुक्त यशोवर्धन आजाद ने केंद्रीय गृह सचिव को भी आदेश की एक प्रति भेज कर ऐतिहासिक महत्वों की ऐसी फाइलों को चिह्नित करने के लिए समिति का गठन किये जाने की भी बात कही. साथ ही कहा कि उन्हें राष्ट्रीय अभिलेखागार को सौंप दिया जाना चाहिए.

आयुक्त ने कहा है कि यह शोधकर्ताओं और शोधार्थीयों के लिए असल खजाना साबित होगा क्योंकि बड़ी संख्या में लोग इतिहास के पन्नों को खंगालते हैं. उन्होंने मंत्रालय को दस्तावेज को नये सिर से खोजने और मिलने पर उसकी एक प्रति आरटीआई आवेदक सैय्यद खालिक को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया.

इस मामले की जड़ें निजाम हैदराबाद के मीर उस्मान अली खान, हैदराबादी रियासत के आखिरी शासक थे. उन्होंने अपने पोते नवाब मीर बरकत अली खान को नामित किया था, जिन्हें मुकर्रम जहां बहादुर भी कहा जाता है, क्योंकि उनके उत्तराधिकारी ने उन्हें निजाम का नाम दिया था.

मीर बरकत अली खान के पक्ष में हैदराबाद की राज्य के शासक के रूप में “मान्यता का प्रमाण” 24 फरवरी, 1967 से प्रभावी है – जिस तारीख को निजाम का मृत्यु हो गई थी.

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