बीजिंग | 8 नवम्बर को प्रधानमंत्री मोदी ने नोट बंदी का एलान किया. उन्होंने लोगो को बताया की इससे देश में कालाधन और भ्रष्टाचार खत्म हो जाएगा. इसके लिए प्रधानमंत्री ने लोगो से 50 दिन का समय माँगा. इन 50 दिनों में देश में कैश की घोर किल्लत रही, न एटीएम में कैश था और न बैंकों में. हालाँकि हालात अब कुछ सुधरे है लेकिन पहले जैसे होने में अभी कुछ महीने और लगेंगे. इस कवायद से देश को क्या मिला, कितना कालाधन पकड़ा गया और कितना पैसा वापिस बैंकों में आया, ये आंकड़े अभी परदे में है.

लेकिन हमारे पडोसी चीन ने नोट बंदी के फैसले की कड़ी आलोचना की है. चीन के प्रसिद्ध अख़बार ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने मोदी सरकार के नोट बंदी के फैसले का खूब मजाक बनाया है. अखबार के सम्पादकीय में लिखा गया है की नोट बंदी कुछ इस तरह की घोषणा थी जैसे कोई बेघरो को एक महीने मे, मंगल ग्रह पर घर बनाकर देने का वादा करता हो. अखबार न नोट बंदी को बड़ी असफलता करार दिया.

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ग्लोबल टाइम्स ने लिखा, ‘ नोट बंदी एक बड़ी असफलता के रूप में सामने आई है. दुर्भाग्य से , नोट बंदी की वजह से भारत की अर्थव्यवस्था दस साल पीछे चली गयी है. जिसकी वजह से नौकरिया कम हो गयी, कारोबार बंद हो गए और किसानो की फसल बर्बाद हो गयी. नोट बंदी की मार बुजर्गो के ऊपर मानसिक और शारीरिक, दोनों तरह से पड़ी है. घंटो बैंक की लाइन में लगने की वजह से उन्हें घोर शारीरिक कष्ट झेलना पड़ा जिसकी वजह से कुछ मौते भी हो गयी’.

अखबार ने मोदी सरकार के लोगो से डिजिटल ट्रांसेक्सन को अपनाने की अपील पर भी सवाल उठाये. अखबार ने लिखा की आप कैसे बिना मूलभूत ढांचे को तैयार किये , कैशलेस इकॉनमी की बात कर सकते है. कोई भी देश बिना आधारभूत संरचना के रातो रात कैश आधारिक इकॉनमी से डिजिटल इकॉनमी में नही बदल सकता. नोट बंदी से देश में न केवल भ्रष्टाचार बढ़ा है बल्कि ऐसा प्रतीत होता है की जैसे यह पूरी कवायद बिना तर्क, बिना समझ और बिना योजना के लागु की गयी है.

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