नई दिल्ली: लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर जारी गतिरोध के बीच चीन ने कहा है कि वह लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने को मान्‍यता नहीं देता है। भारत ने चीनी दावे को ख़ारिज कर दिया है।

चीन के विदेश मंत्रालय के वांग वेनबिन ने कहा कि भारत ने लद्दाख की स्‍थापना अवैध तरीके से की है। चीनी प्रवक्‍ता ने यह भी कहा कि हम विवादित इलाके में भारत के सैन्‍य उद्देश्‍यों की पूर्ति के लिए आधारभूत ढांचे के निर्माण का भी विरोध करते हैं। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्‍ता ने कहा कि हाल ही में दोनों देशों के बीच हुई सहमति के मुताबिक दोनों में से कोई भी पक्ष सीमा क्षेत्र में ऐसा कोई कदम नहीं उठाएंगे जिससे स्थिति बिगड़ जाए। इसलिए दोनों देशों के बीच माहौल को सुधारने के लिए किए जा रहे प्रयासों को प्रभावित नहीं किया जाना चाहिए।

चीन के इस बयान पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा, “हमनें भारत-चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा के बारे में चीन के एक प्रवक्ता के हवाले से आई रिपोर्ट देखी है। भारत ने कभी भी एक तरफ़ा कार्रवाई के तहत 1959 में बनाए गए एलएसी को स्वीकार नहीं किया है। हमारी यह स्थिति हमेशा से रही है, और चीन समेत सभी को इस बारे में पता भी है।”

भारत ने अपने बयान में आगे कहा, “2003 तक दोनों तरफ़ से एलएसी के निर्धारण की दिशा में कोशिश होती रही लेकिन इसके बाद चीन ने इसमें दिलचस्पी दिखानी बंद कर दी लिहाज़ा ये प्रक्रिया रुक गई। इसलिए अब चीन का इस बात पर ज़ोर देना कि केवल एक ही एलएसी है, यह उन्होंने ने जो वादे किए थे, उनका उल्लंघन है।”

वहीं वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आर के एस भदौरिया ने पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ सीमा पर चल रहे गतिरोध को लेकर कहा कि हमारी उत्तरी सीमा पर मौजूदा सुरक्षा परिदृश्य असहज है जहां ‘न युद्ध न शांति’ की स्थिति है। भदौरिया ने कहा कि वायुसेना ने स्थिति पर तेजी के साथ प्रतिक्रिया दी है और वह क्षेत्र में किसी भी ‘दुस्साहस’ का जवाब देने के लिए दृढ़ संकल्पित है।

वायुसेना प्रमुख ने कहा, ‘हमारी उत्तरी सीमा पर मौजूदा सुरक्षा परिदृश्य असहज बनी हुई है, ये स्थिति न युद्ध की है और न शांति की ही है. जैसा कि आप जानते हैं हमारे सुरक्षा बल किसी भी चुनौती से निपटने के लिये पूरी तरह तैयार हैं।’

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