Friday, January 28, 2022

NRC लिस्ट से बाहर बच्चों को डिटेंशन सेंटर नहीं भेजा जाएगा: सरकार

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केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी है कि यदि मां-बाप का नाम नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस (एनआरसी) में है तो उनके बच्चों को असम में डिटेंशन सेंटर नहीं भेजा जाएगा। केंद्र की तरफ से अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल में शीर्ष अदालत को यह जानकारी सोमवार को दी।

दरअसल, एक ग़ैर-सरकारी संस्था सिटीज़न्स फ़ॉर जस्टिस एंड पीस (सीजेपी) की ओर से ऐसे क़रीब 60 बच्चों के माता-पिता की तरफ़ से सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई थी।जिनके माता-पिता को फाइनल एनआरसी में शामिल किया गया है, लेकिन उनके बच्चों को उससे बाहर कर दिया गया है।

संस्था की वकील अपर्णा भट्ट ने आशंका जताई की उन बच्चों को माता-पिता से अलग करके असम में डिटेंसन सेंटर भेजा जा सकता है। इस पर केंद्र सरकार की ओर से पेश अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि जब तक इस अर्जी पर निर्णय लंबित है तब तक ऐसे किसी भी बच्चे को माता पिता से अलग करके डिटेंसन सेंटर नहीं भेजा जाएगा जिनके माता पिता को एनआरसी के जरिए नागरिकता मिली हुई है।

अदालत ने अपने आदेश में इस आश्वासन को दर्ज किया, ‘मिस्टर वेणुगोपाल, अटॉर्नी जनरल ऑफ इंडिया ने कहा है कि जिन माता-पिता को भारत की नागरिकता मिल चुकी है उनके बच्चों को उनसे अलग नहीं किया जाए। इस याचिका पर डिटेंशन सेंटर भेजने का निर्णय लंबित रखा जाता है।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में बनी कमेटी ने असम में 31 अगस्त 2019 को एनआरसी की अपडेटेड लिस्ट जारी की थी। इस लिस्ट में क़रीब 19 लाख लोगों के नाम शामिल नहीं थे।

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