junes

junes

असम के दरंग जिले के सरकारी अस्पताल में स्वास्थकर्मियों की लापरवाही के कारण जन्म के समय दो बच्चों की अदला-बदली हो गई थी. जिसका पता तीन साल बाद DNA टेस्ट में पता चला.

दरअसल, 11 मार्च 2015 को शहाबुद्दीन अहमद की पत्नी सलमा अहमद ने और अनिल बोड़ो की पत्नी सेवाली ने मंगलदई के सरकारी अस्पताल में सुबह बच्चें को जन्म दिया था. लेकिन अस्पताल कर्मचारियों की लापरवाही से दोनों बच्चों की अदला-बदली हो गई. जिसके चलते शहाबुद्दीन का बेटा अनिल के घर और अनिल का बेटा शहाबुद्दीन के घर पहुँच गया.

मुस्लिम परिवार में शादीे करने के इच्छुक है तो अभी फोटो देखकर अपना जीवन साथी चुने (फ्री)- क्लिक करें 

शहाबुद्दीन ने बताया कि उसने अपने पुत्र का नाम जुनेद अहमद रखा कुछ दिनों तक सब कुछ ठीक रहने के बाद ज्यो ज्यो बच्चा बड़ा होता गया तो जुनेद का चेहरा मंगोल ट्राइबल जैसा उभरने लगा इसके बाद सलमा को शक हुवा लेकिन ऊपर वाले का आशीर्वाद समझ सलमा चुप हो गई.  लेकिन जब जब वह जुनेद को देखती तो रोने लगती.

सलमा के दर्द को शहाबुद्दीन सहन नहीं कर सका. उसने इस पुरे मामले का सच जानने के लिए स्वास्थ्य विभाग से अपने बच्चें के जन्म का और 11 मार्च 2015 को पैदा हुए अन्य बच्चों के जन्म का विवरण माँगा. जिसमे उने पता चला कि उस दिन उनके बच्चें सहित केवल दो बच्चों का जन्म हुवा था.

शहाबुद्दीन स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के आधार पर अनिल बोड़ो के घर बैजपारा पहुँच गया.  शहाबुद्दीन ने अनिल बोड़ो को  पूरी कहानी सुनायी और अनिल से सहयोग माँगा. शहाबुद्दीन ने अनिल के सहयोग से स्वास्थ्य विभाग में उच्च अधिकारियों से इस पुरे मामले की जांच की बात कही. लेकिन कुछ नही हुआ.

अंत में शहाबुद्दीन ने अपने शक को मिटाने  के लिए अपने स्तर पर हैदराबाद  के एक लेबोरटरी में बच्चे का DNA टेस्ट कराया और DNA टेस्ट ने यह साबित कर दिया क़ि बच्चा उसका नहीं है. DNA टेस्ट के बाद शहाबुद्दीन ने मंगलदई थाना में केस संख्या 990/2015  धारा 120(B)/420  के तहत एक मामला दर्ज कराया. जिसके बाद ये मामला अदालत में चला गया.

4 जनवरी 2017 को अदालत ने शहाबुद्दीन के हक़ में फैसला देते हुए कहा कि बच्चो की अदला बदली हुई है. लेकिन कोर्ट परिसर में दोनों ही बच्चों ने अपनी उन मांओं को छोड़ने से मना कर दिया, जिन्होंने उन्हें अभी तक पाला था. डर की वजह से दोनों ही अपनी मां से चिपके रहे. ऐसे में दोनों पिताओं ने बच्चों को उनकी मांओं से अलग करने से मना कर दिया.

शहाबुद्दीन ने मीडिया से कहा, “अगर हम बच्चों को उन महिलाओं से अलग करेंगे, जिन्हें उन्होंने अपनी मां मान लिया है, तो ये उनके लिए दिल टूटने वाले हालात होंगे. ऐसे में दोनों ही इस मुश्किल हालात को बर्दाश्त नहीं कर पाएंगे. जरूर अल्लाह भी इस अमानवीय काम के लिए माफ नहीं करेगा. इसलिए हमने बच्चों को ना बदलने का फैसला किया. हम उसी बच्चे को घर ले जाएंगे, जिसे अभी तक पाल रहे थे.” कोर्ट ने दोनों ही परिवारों को अपने-अपने फैसले का हलफनामा दायर करने का आदेश दिया है. जिसके लिए अगली तारीख 24 जनवरी निर्धारित की गई है