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असम में एनआरसी के मुद्दे पर मुख्य चुनाव आयुक्त ने साफ कर दिया कि NRC में नाम नहीं होने पर वोट डाले जा सकेंगे हालांकि वोटर लिस्ट में नाम शामिल होना अनिवार्य शर्त है।

मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने कहा कि NRC में जिनके नाम कटे वो घबराएं नहीं, अगर वोटर लिस्ट में नाम है तो वे भी वोट सकेंगे। उन्होंने कहा कि NRC ड्राफ़्ट के आधार पर नाम नहीं हटेगा। 4 जनवरी को वोटर लिस्ट जारी हो जाएगा. उन्होंने कहा कि ‘जिनके नाम कटे हैं, वो अब भी वोटर’ हैं।

ओपी रावत ने कहा कि मैंने राज्य में अपने चुनावी तंत्र से कहा है कि वह यह सुनिश्चित करे कि सभी योग्य मतदाताओं का नाम अगले साल सारांश पुनरीक्षण के दौरान मतदाता सूची में शामिल किया जाए। रावत ने कहा कि निर्वाचन आयोग अपने ‘कोई मतदाता पीछे न छूटे’ के लक्ष्य के साथ असम के मुख्य निर्वाचन अधिकारी से कहा है कि वह एनआरसी के राज्य समन्वयक के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करें कि सभी योग्य मतदाता 2019 के सारांश पुनरीक्षण के दौरान मतदाता सूची में शामिल किये जाएं।

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रावत ने कहा कि हमने असम के सीईओ से एनआरसी से तालमेल कर हफ्तेभर में रिपोर्ट मांगी है। उन्‍होंने कहा कि सीईओ के आंकड़े से यह ज्ञात हो जाएगा इस सूची में कितने बच्‍चे, नए वोटर और कितने अधेड़ या बुजुर्ग हैं। उन्‍होंने कहा कि महिलाओं और पुरुषों की भी संख्‍या भी हमने मांगी है। इस तरह से  हमारे पास एक पूरा डाटा होगा। इससे समय रहते पूरी तस्‍वीर साफ हो जाएगी।

उन्‍होंने कहा कि 40 लाख लोगों की नागरिकता के दावों की पुष्टि के बाद चुनाव आयोग अपनी तरफ से वेरिफिकेशन कर उनका नाम मतदाता सूची में दर्ज कर लेगा। बता दें कि असम में सोमवार को जारी राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के मसौदे से कुल 3.29 करोड़ आवेदकों में से 40 लाख से ज्यादा लोगों को बाहर किए जाने से उनके भविष्य को लेकर चिंता पैदा हो गई है।

रावत ने कहा कि हम एनआरसी से बंधे नहीं हैं। हां, हम उनके डाटा से अपने डाटा का मिलान जरूर करेंगे। उन्होने कहा, जितने लोगों ने अपने दस्तावेज और अर्जी हमारे ERO यानी इलेक्टोरल रोल ऑफिसर के दफ्तर में जमा करा देंगे तो उनकी जांच के बाद वोटर लिस्ट में दर्ज कर लिया जाएगा।

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