नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) अधिनियम के मौजूदा स्वरूप की संवैधानिक वैधता को उच्चतम न्यायालय में बुधवार को चुनौती दी।

राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की है जिसमें कहा गया है कि यह एक्ट संविधान का उल्लंघन करता है। एनआईए को राज्य के मामलों में हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं है।

याचिका में कहा गया है कि ‘एनआईए राज्यों से किसी भी मामले की जांच के अधिकार को छीनता है जो केंद्र को विवेकाधीन और मनमानी शक्तियां प्रदान करता है। एनआईए एक्ट राज्य के संप्रभुता के और संविधान के खिलाफ है। यह राज्य पुलिस द्वारा की जाने वाली जांच के लिये केन्द्र को एक जांच एजेन्सी के सृजन का अधिकार देता है जबकि यह संविधान की सातवीं अनुसूची के अंतर्गत राज्य का विषय है।’

छत्‍तीसगढ़ सरकार का कहना है कि इस कानून के मौजूदा स्वरूप से राज्य पुलिस को जांच का मिला संवैधानिक अधिकार प्रभावित होता है। गौरतलब है कि 2008 में जब एनआईए कानून बना था उस वक्त केंद्र में कांग्रेस की अगुवाई वाली सरकार थी। उस समय कानून बनाते वक्‍त 26/11 के मुंबई हमले को आधार बनाया गया था। गत वर्ष इसमें संशोधन किया गया है।

छत्तीसगढ़ सरकार का यह भी कहना है कि एनआईए कानून के प्रावधानों में तालमेल के लिये अथवा केंद्र द्वारा राज्य सरकार से किसी भी प्रकार की सहमति लेने के बारे में कोई व्यवस्था नहीं है। उसके मुताबिक यह संविधान में प्रदत्त राज्य की सार्वभौमिकता के विचार के खिलाफ है।

इसके साथ ही छत्तीसगढ़ पहला ऐसा राज्य बन गया है जिसमें एनआईए के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दीवानी मुकदमा दायर किया है। एडवोकेट जनरल सतीश वर्मा के अनुसार, एनआईए द्वारा राजनीतिक रूप से जुड़े चुने हुए मामलों की जांच करने के कारण उन्हें याचिका दाखिल करनी पड़ी।

एनआईए अधिनियम, एनआईए को भारत के किसी भी हिस्से में आतंकवादी गतिविधि का स्वत: संज्ञान लेने, उस सरकार से अनुमति के बिना किसी भी राज्य में प्रवेश करने, लोगों की जांच करने और गिरफ्तार करने के लिए मुकदमा दर्ज करने की शक्तियां देता है।

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