सवर्णों को आर्थिक आधार पर 10 फीसदी आरक्षण देने का मुद्दा  सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया है। यूथ फॉर इक्विलिटी ने संविधान संशोधन को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। याचिका में कहा गया है कि ये संशोधन सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ है और आर्थिक आधार पर आरक्षण नहीं दिया जा सकता।

यूथ फॉर इक्वलिटी ने दायर याचिका में इस मुद्दे पर तत्काल सुनवाई की मांग की है और आर्थिक आधार पर नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण दिये जाने वाले इस संशोधन पर स्टे लगाने की मांग की है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई नहीं हुई है। माना जा रहा है कि सर्वोच्च न्यायालय में इस पर अगले हफ़्ते सुनवाई हो सकती है।

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याचिका में दावा किया गया है, “यह संविधान संशोधन पूरी तरह से उस संवैधानिक मानदंडों का उल्लंघन करता है जिसके तहत इंदिरा साहनी केस में नौ जजों ने कहा था कि आरक्षण का एकमात्र आधार आर्थिक स्थिति नहीं हो सकती। इस तरह यह संशोधन कमज़ोर है और इसे निरस्त किए जाने की ज़रूरत है क्योंकि यह केवल उस फ़ैसले को नकारता है।”

बता दें कि मोदी सरकार की ओर से देश भर के गरीब सवर्णों को 10 प्रतिशत आरक्षण देने वाला ऐतिहासिक विधेयक बुधवार को राज्यसभा में भी पास हुआ। लोकसभा और राज्यसभा से इस बिल के पास होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे सामाजिक न्याय की जीत बताया और कहा कि यह देश की युवा शुक्ति को अपना कौशल दिखाने के लिए व्यापक मौका सुनिश्चित करेगा तथा देश में एक बड़ा बदलाव लाने में सहायक होगा।

पीएम मोदी ने कई ट्वीट में लिखा, ‘‘खुशी है कि संविधान (124वां संशोधन) विधेयक पारित हो गया है जो सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को शिक्षा एवं रोजगार में 10 प्रतिशत आरक्षण मुहैया कराने के लिए संविधान में संशोधन करता है। मुझे देखकर प्रसन्नता हुई कि इसे इतना व्यापक समर्थन मिला।” 

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