नई दिल्ली | पिछले कई दिनों से तमिलनाडु में जलीकट्टू खेल के आयोजन को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे है. तमिलनाडु के अन्दर फ़िलहाल सभी कामकाज ठप्प पड़े हुए है. सडको से ऑटो रिक्शा और बसे गायब है , केवल एक दुक्का सरकारी बसे ही चल रही है. यहाँ तक की बैंकों में भी कामकाज प्रभावित हुआ है क्योकि काफी बैंक कर्मचारी भी प्रदर्शन में शामिल है. चेन्नई की आईटी कंपनियों के काफी कर्मचारी विरोध प्रदर्शन में हिस्सा ले रहे है.

जलीकट्टू को लेकर तमिलनाडु में विस्तार लेते विरोध प्रदर्शनों को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री पनीरसेलवम ने दो दिन पहले प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की थी. मोदी की तरफ से आश्वासन मिलने के बाद राज्य सरकार ने कल सभी क़ानूनी अडचने दूर करने के बाद अध्यादेश को मंजूरी दे दी थी. राज्य सरकार ने इस अध्यादेश को कल ही केंद्र सरकार के पास मंजूरी के लिए भेज दिया था.

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वही गृह मंत्रालय, कानून मंत्रालय और पर्यारण मंत्रालय ने इस अध्यादेश पर तत्परता दिखाते हुए इसकी समीक्षा की और पशु क्रूरता अधिनियम के प्रावधानों से सांडो को अलग करने सम्बन्धी संसोधन को मंजूरी दे दी. इस संसोधन की आवश्यकता इसलिए थी क्योकि जलीकट्टू खेल में सांडो का इस्तेमाल किया जाता है. राज्य सरकार के अध्यादेश को मंजूरी देकर वापिस राज्य सरकार के पास भेज दिया गया है.

उम्मीद है आज राज्य सरकार की कैबिनेट इस अध्यादेश पर मोहर लगा देगी. इसके बाद यह अध्यादेश मंजूरी के लिए राज्यपाल विधासागर राव के पास भेजा जाएगा. चूँकि विधासागर राव महाराष्ट्र के भी राज्यपाल है इसलिए वो इस चेन्नई के लिए रवाना हो चुके है. राज्यपाल से मंजूरी मिलते ही जलीकट्टू खेल के आयोजन को हरी झंडी मिल जाएगी. उम्मीद है इसके बाद विरोध प्रदर्शन बंद होंगे और तमिलनाडु में आम जिन्दगी पटरी पर लौटेगी.

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