Sunday, October 17, 2021

 

 

 

केंद्र ने मुस्लिम महिलाओं को मिले उत्‍तराधिकार में बराबरी की याचिका का किया विरोध

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सहारा कल्याण समिति द्वारा मुस्लिम महिलाओं को समान अधिकार दिलाने के लिए हाईकोर्ट में दायर याचिका का केंद्र सरकार ने विरोध किया है। इस याचिका में मुस्लिम महिलाओं के साथ भेदभाव का आरोप लगाकर ​​उनकी विरासत के अधिकार में बराबरी की मांग की गई है।

कानून और न्याय मंत्रालय ने याचिका के विरोध में दाखिल शपथ-पत्र में कहा, ‘याचिका की विषय वस्तु और इसकी संवेदनशीलता के महत्व को ध्यान में रखते हुए, विभिन्न समुदायों को नियंत्रित करने वाले विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों के प्रावधानों का गहन अध्ययन जरुरी है।’

इसके अलावा कानून मंत्रालय ने भारत के विधि आयोग से यूनिफॉर्म सिविल कोड से संबंधित विभिन्न मुद्दों की जांच करने और इसके लिए सिफारिशें करने का अनुरोध किया है।

केंद्र की स्थाई वकील मोनिका अरोड़ा के जरिए दायर हलफनामे में आगे कहा गया, ‘याचिका कानून या तथ्यों पर टिकाऊ नहीं है। इसी तरह की एक याचिका को केरल हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया था, जिसने माना था कि मुस्लिम पर्सनल लॉ की संवैधानिकता को एक रिट याचिका में दायर नहीं किया जा सकता है।’

मंत्रालय ने केरल हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा, ‘यह तय करना विधानमंडल का काम है कि उत्तराधिकार के मामले में मुसलमानों को नियंत्रित करने के लिए किसी भी कानून को तैयार किया जाए या नहीं।’

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