AFSPA को कमजोर करना नही चाहती केंद्र सरकार, सुप्रीम कोर्ट में कहा, सेना को कार्यवाही करने की देनी होगी छूट

10:46 am Published by:-Hindi News

नई दिल्ली | देश के अशांति वाले क्षेत्र में सेना को AFSPA के अंतर्गत दी गयी ताकत को केंद्र सरकार कम करने के पक्ष में नही है. उनका तर्क है की अगर सेना की ताकत को कम किया गया तो उसे आधुनिक हथियारों से लेस अपने दुश्मनों से लोहा लेने में मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा. केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी की है की सेना की कार्यवाही को न्यायिक समीक्षा से अलग रखना चाहिए.

दरअसल पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था की देश के सभी अशांति वाले इलाको में सेना की कार्यवाही की दौरान होने वाली मौतों के लिए भी एफआरआर दर्ज करनी अनिवार्य होगी. चाहे उस क्षेत्र में सेना को AFSPA के अंतर्गत कुछ खास पॉवर ही क्यों न दी गयी हो. सुप्रीम कोर्ट के इसी आदेश के खिलाफ केंद्र सरकार ने अपील की है. बुधवार को इसी मामले में सरकार ने कोर्ट के सामने अपना पक्ष रखा.

अटोर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने चीफ जस्टिस जेएस खेहर की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने तर्क दिया की भारतीय सेना को परिस्थिथियो के अनुसार निर्णय लेने के अधिकार देने ही होंगे. क्योकि जब सेना आधुनिक हथियारों से लेस उपदर्वियो का सामना कर रही है तो उसे अपनी ताकत का इस्तेमाल करने की छूट होनी चाहिए. इसलिए इन कार्यवाही में होने वाली मौत को न्यायिक समीक्षा से अलग रखना चाहिए.

मुकुल ने आगे कहा की अगर एक सैनिक को आतंकवादियों के खिलाफ कार्यवाही करते हुए एफआईआर का भय होगा तो आतंक के खिलाफ लड़ाई बेहद मुश्किल हो जाएगी. केंद्र सरकार का सुप्रीम कोर्ट में दिया गया तर्क सेना अध्यक्ष विपिन रावत के उस बयान का समर्थन करता है जिसमे उन्होंने कहा था की अगर सेना के ऑपरेशन के बीच पत्थरबाज बाधा पहुंचाएंगे तो हम उन्हें भी आतंकी ही समझेगे और उनके खिलाफ उसी अनुसार कार्यवाही होगी.

खानदानी सलीक़ेदार परिवार में शादी करने के इच्छुक हैं तो पहले फ़ोटो देखें फिर अपनी पसंद के लड़के/लड़की को रिश्ता भेजें (उर्दू मॅट्रिमोनी - फ्री ) क्लिक करें