केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने नौवीं से लेकर बारहवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों के पाठ्यक्रम में कटौती की है। पाठ्यक्रम में कमी के दौरान धर्मनिरपेक्षता और राष्ट्रवाद जैसे कई अध्यायों को मौजूदा शैक्षणिक वर्ष के लिए पाठ्यक्रम से हटा दिया गया।

मंत्रालय के आदेश के बाद, सीबीएसई ने घोषणा की कि महामारी के कारण यह कदम उठाया गया था। बोर्ड ने कक्षा 9-12 में पढ़ाए जाने वाले राजनीति विज्ञान और अर्थशास्त्र को संशोधित किया है। पाठ्यक्रम में कटौती के बाद अब धर्मनिरपेक्षता और राष्ट्रवाद जैसे कई अध्यायों को मौजूदा शैक्षणिक वर्ष के लिए पाठ्यक्रम से हटा दिया गया है। सीबीएसई ने इन सभी अध्यायों को मौजूदा एक वर्ष के लिए सिलेबस से हटा दिया है।

वहीं 11वीं कक्षा की किताबों से किसान, जमींदार और राज्य, बंटवारे, विभाजन और देश में विद्रोह पर सेक्शन- ‘द बॉम्बे डेक्कन’ और ‘द डेक्कन रायट्स कमिशन’, जो कि साहूकारों के खिलाफ किसानों के आंदोलन पर आधारित हैं, इन सभी चैप्टरों को हटा दिया गया है।

कार्यस्थल पर भारतीय संविधान के तहत आने वाले फेडरलिज्म जैसे टॉपिक, स्थानीय सरकारों की जरूरत, भारत में स्थानीय सरकार की ग्रोथ जैसे चैप्टर्स को भी 11वीं कक्षा के राजनीति विज्ञान के विषय से हटा दिया गया है। सीबीएसई द्वारा पाठ्यक्रम में की गई कटौती से 12वीं कक्षा के छात्रों को अब इस मौजूदा वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था का बदलता स्वरूप, नीति आयोग, जीएसटी जैसे विषय नहीं पढ़ाए जाएंगे।

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने कहा, “कोरोना के कारण उत्पन्न हुए मौजूदा हालात को देखते हुए सीबीएसई के सिलेबस में कक्षा 9 से 12 तक 30 प्रतिशत कटौती करने का निर्णय लिया गया है। सीबीएसई के सिलेबस में यह कटौती के केवल इसी वर्ष 2020-21 के लिए मान्य होगी।”

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