नई दिल्ली | दो साध्वियो से रेप करने के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम के नए नए किस्से सामने आ रहे है. इसी बीच इस मामले की जाँच कर चुके एक सीबीआई अधिकारी ने भी मीडिया के सामने आकर राम रहीम के बारे में कई खुलासे किये है. उन्होंने राम रहीम को असली जानवर बताते हुए कहा की वो एक शातिर अपराधी की तरह अपराध करने के बाद सबूतों को मिटा देते था.

साल 2002 में एक साध्वी के गुमनाम पत्र का संज्ञान लेकर हाई कोर्ट ने मामले की जांच सीबीआई को सौपी थी. उस समय सीबीआई के तत्कालीन प्रमुख विजय शंकर थे. विजय शंकर ने मामले की जांच के लिए सीबीआई के पूर्व डीआईजी एम नारायणन को बुलाया और उन्हें साध्वी के पत्र के साथ साथ पत्रकार रामचंद्र छत्रपति और एक साध्वी के भाई रंजीत सिंह की मौत से सम्बंधित फाइल सौपी. उस समय कोर्ट ने सीबीआई को 57 दिन के अन्दर जांच पूरी करने का आदेश दिया था.

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न्यूज़ 18 से बात करते हुए एम् नारायण ने बताया की यह केस इसलिए भी पेचीदा था क्योकि पत्र पर किसी का नाम या पता नही था. इसके अलावा डेरा प्रमुख से मिलने के लिए भी हमे काफी मसक्कत करनी पड़ी. जब हम उनसे मिले तो उन्होंने हमें केवल 30 मिनट का समय दिया. वो उस समय अपनी गुफा में रहते थे. हमने उनसे करीब तीन घंटे पूछताछ की. उनकी गुफा में ऐशोआराम की हर चीज उपलब्ध थी.

नारायण ने इंटरव्यू में बताया की राम रहीम गुफा में एक मध्यकालीन सामंतो की तरह रहता था. वो हमेशा साध्वियो से घिरा रहता था. रात के 10 बजे साध्वियो की प्रमुख एक साध्वी को राम रहीम के पास सोने भेजती थी. उसकी गुफा में कंडोम और गरभनिरोधक का ढेर लगा हुआ था. वो मैनियाक था, असली जानवर. नारायण ने आगे बताया की उस समय हमें कई धमकिया मिली , फिर भी हम 10 पीड़ित साध्वियो के साथ सम्पर्क साधने में कामयाब रहे.

लेकिन इनमे से ज्यादातर शादीशुदा थी इसलिए राम रहीम के खिलाफ केस नही करना चाह रही थी. बाद में 2 साध्वी इसके लिए तैयार हुई और हमने 56वे दिन कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल कर दिया. फ़िलहाल नारायण रिटायर होने के बाद अपने परिवार के साथ केरल में रह रहे है. इसके लिए भी वो खुद को खुशनसीब बताते है. उनका कहना है की मैं खुशनसीब हूँ की राम रहीम को सजा मिलने के समय में दिल्ली से दूर हूँ.

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