श्रीनगर । जम्मू कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती ने एक बड़ा फ़ैसला लेते हुए 4 हज़ार से अधिक युवाओं पर से पत्थरबाज़ी और प्रदर्शन करने के मामले वापिस ले लिए। मुफ़्ती ने पीछले साल गठित एक समिति की सिफ़ारिश के बाद यह फ़ैसला किया। सरकार के इस फ़ैसले से 4327 युवाओं को दोबारा नए सिरे से अपनी ज़िंदगी शुरू करने का मौक़ा मिलेगा।

इंडियन इक्स्प्रेस से बात करते हुए महबूबा मुफ़्ती ने कहा की यह एक सतत प्रक्रिया है। इस फ़ैसले से हम युवाओं को अपनी ज़िंदगी का पुनर्निर्माण करने में मदद कर रहे है। हमने पीछले साल गठित समिति की सिफ़ारिश के बाद यह फ़ैसला लिया है। फ़िलहाल यह साल 2014 तक दर्ज किए गए मामले के ऊपर हमने फ़ैसला लिया है लेकिन समिति को 2015,16 और 17 में दर्ज किए गए मामलों की भी जाँच करने के आदेश दिए गए है।

सरकार द्वारा गठिति समिति के अध्यक्ष और सूबे के डीजीपी एसपी वेद ने कहा की हम पहले 2008,09 और 10 के मामले देख रहे थे। पीछले साल हमें 2014 तक के मामलों की जाँच करने का आदेश दिया गया। फ़िलहाल हमने अपनी जाँच रिपोर्ट सरकार को सौप दी है। हमने उन लोगों पर से मुक़दमे वापिस लेने की सिफ़ारिश की है जो पहली बार इस तरह के अपराध में शामिल हुए है। इनमे युवा, महिलायें और नाबालिग शामिल है।

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वेद ने इस बात से इंकार कर दिया की सभी लोगों के ऊपर से मामले वापिस किए जा रहे है। उन्होंने कहा कि उन लोगों पर से कोई मामला वापिस नही लिया जाएगा जो बार बार इस तरह के कृत्य में शामिल है। फ़िलहाल हमने 744 मामलों में 4327 लोगों पर से पत्थरबाज़ी और प्रदर्शन करने के मामले वापिस लेने की सिफ़ारिश की है। वेद ने आगे कहा कि वो पीछले तीन सालों के मामलों में भी यही मापदंड अपनाएँगे।