Saturday, October 23, 2021

 

 

 

अमेरिका के जाल में फंसा भारत, ईरान के सस्ते तेल से हाथ धो बैठा

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अमेरिकी प्रतिबंधों से छूट खत्म होने के बाद भारत ने इसी महीने ईरान से क्रूड ऑइल खरीदना बंद कर दिया। लिहाजा भारत की निगाहें सऊदी अरब, इराक और अमेरिका पर लगी थीं। लेकिन, अमेरिका ने भारत को सस्‍ती दर पर तेल बेचने से हाथ खींच लिए हैं।

सोमवार को अमेरिका ने कहा कि वह भारत को ईरान के सस्ते तेल का आयात रोकने से होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए रियायती दर पर अपना कच्चा तेल बेचने का भरोसा नहीं दे सकता है। ट्रेड फोरम में हिस्सा लेने भारत आए अमेरिकी कॉमर्स सेक्रटरी विल्बर रॉस ने यह बात कही।

रॉस ने कहा, ‘तेल पर मालिकाना हक निजी हाथों में है इसलिए सरकार दाम में छूट देने के लिए लोगों पर दबाव नहीं बना सकती।’ आपको बता दें कि ईरान से कच्चा तेल मंगाना भारतीय रिफाइनरीज के लिए फायदेमंद होता है। ईरान खरीदारों को भुगतान के लिए 60 दिन का समय देता है। यह सुविधा अन्य देशों जैसे सऊदी अरब, कुवैत, इराक, नाइजीरिया और अमेरिका के साथ उपलब्ध नहीं है।

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अमेरिका ने भारत को आश्वस्त करते हुए यह भी कहा है कि वह सऊदी अरब और यूनाइटेड अरब अमीरात जैसे देशों से बातचीत कर रहा है जिससे भारत को अमेरिकी प्रतिबंधों में छूट न बढ़ने के बावजूद तेल की सप्लाई मिल सके। इस बीच, तेल मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा, ‘भारतीय रिफाइनरीज की जरूरत के मुताबिक तेल की सप्लाई के लिए एक मजबूत योजना तैयार है।’

बता दें कि चीन के बाद ईरान से क्रूड ऑइल खरीदने वाला भारत दूसरा सबसे बड़ा देश है। 31 मार्च को खत्म हुए वित्त वर्ष (2018-19) में भारत ने ईरान से करीब 24 मिलियन टन क्रूड ऑइल खरीदा। ईरान ने भारत की तेल जरूरत के 10% से ज्यादा की आपूर्ति की। अब तेल सप्लाई की इस कमी को सऊदी अरब, कुवैत, यूएई और मेक्सिको जैसे देशों से पूरा किया जाएगा।

2018-19 में इराक और सऊदी अरब के बाद ईरान दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल निर्यातक देश है। इसके अलावा अमेरिका ने भारत से जनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रेफरेंसेज (GSP) कार्यक्रम के लाभार्थी का दर्जा वापस ले लिया है। GSP कार्यक्रम के तहत भारत को 5.6 अरब डॉलर (लगभग 40 हजार करोड़ रुपए) के निर्यात पर छूट मिलती थी।

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