अमेरिकी थिंक टैंक प्यू रिसर्च सेंटर के मुताबिक साल 2050 तक दुनिया में मुस्लिम आबादी सबसे ज़्यादा भारत में होगी, जो 30 करोड़ तक पहुंच जाएगी.  इसके बावजूद भारत में हिंदू धर्म को मानने वाले ही बहुसंख्यक रहेंगे.  फ़िलहाल इंडोनेशिया सबसे ज़्यादा मुस्लिम आबादी वाला देश है जहाँ लगभग 25 करोड़ मुसलमान रहते हैं.

द फ्यूचर ऑफ वर्ल्ड रिलिजन रिपोर्ट में कहा गया, 2050 तक दुनिया की पॉपुलेशन 35% के रेट से बढ़ेगी. अगर मौजूदा ग्रोथ रेट 2050 के बाद भी बरकरार रहती है तो 2070 तक दुनिया में सबसे ज्यादा लोग मुस्लिम धर्म को मानने वाले होंगे. 2010 में दुनिया में 1.6 अरब मुस्लिम और 2.17 अरब क्रिश्चियन थे. अगर दोनों धर्म अपनी मौजूदा ग्रोथ रेट के हिसाब से बढ़ते रहे तो 2070 तक इस्लाम को मानने वालों की तादाद क्रिश्चियन्स से ज्यादा होगी. 2050 तक मुसलमान कुल आबादी का करीब 30% यानी 2.8 अरब होंगे.

रोपोर्ट के अनुसार, दूसरे धर्मों की तुलना में इस्लाम को मानने वालों में सबसे ज्यादा युवा आबादी हैं. इस्लाम में 34% आबादी 15 साल से नीचे वालों की है, जबकि दुनिया में 15 साल से नीचे एवरेज  आबादी 27% है. क्रिश्चियनिटी को मानने वालों में नास्तिक बनने वालों और दूसरे धर्म को अपनाने वालों की तादाद बढ़ सकती है. करीब 4 करोड़ लोगों के क्रिश्चियन धर्म से जुड़ने की संभावना है, जबकि 10 करोड़ से ज्यादा लोगों के इससे दूर जाने की आशंका जाहिर की गई है.

रिपोर्ट के मुताबिक, यूरोप और नॉर्थ अमेरिका में बढ़ोत्तरी के बावजूद 2050 तक नास्तिकों की तादाद में गिरावट आएगी. 2050 तक नास्तिकों की तादाद दुनिया की आबादी की 13.2% रह जाएगी, जो अभी 16.4% है. 2050 तक ईसाई कुल आबादी के 31% यानी 2.9 अरब रहेंगे. इस वक्त हिन्दू 34% तक बढ़ेंगे और वे दुनिया में तीसरी सबसे ज्यादा आबादी वाले लोग हो जाएंगे.


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