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नवंबर 2016 में मोदी सरकार द्वारा की गई नोटबंदी के चलते सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) सेक्टर को बड़ी मार झेलनी पड़ी। इतना ही नहीं जीएसटी लागू होने से एमएसएमई सेक्टर के उद्योगों के अनुपालन लागत और अन्य लागतों काफी इजाफा हो गया।

आरबीआई की स्टडी में सामने आया कि 2 साल बाद भी देश का सूक्ष्म, लघु और मध्यम (एमएसएमई) सेक्टर अब तक इसके असर से पूरी तरह से ऊबर नहीं पाया है। आरबीआई की एक स्टडी के अनुसार, बीते दिनों देश में एमएसएमई सेक्टर को लगे नोटबंदी और जीएसटी के दो बड़े झटकों की वजह से वस्त्र उद्योग और रत्न और आभूषण सेक्टर जैसे उद्योग बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार इन सेक्टर में काम करने वालों को वेतन नहीं मिल पा रहा है।

आरबीआई द्वारा प्रकाशित मिंट स्ट्रीट मेमो में कहा गया, ‘इनपुट टैक्स क्रेडिट और अग्रिम जीएसटी रिफंड में देरी के चलते एमएसएमई निर्यात को नोटबंदी से ज्यादा जीएसटी से जुड़ी दिक्कतों ने परेशान किया। इससे छोटे उद्योगों की कार्यशील पूंजी जरूरतें प्रभावित हुईं क्योंकि वह अपने दैनिक कामकाज के लिये नकदी पर निर्भर हैं।’

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 इंटरनेशनल फाइनेंस कॉर्पोरेशन के अनुमान के मुताबिक, एमएसएमई में अधिक से अधिक पूंजी की संभावित मांग करीब 370 अरब डॉलर है जबकि वर्तमान में 139 अरब डॉलर की आपूर्ति की जा रही है।  दोनों के बीच 230 अरब डॉलर का अंतर है, जो कि सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 11 प्रतिशत है।

अक्टूबर 2016 के बाद (नोटबंदी की अवधि) एमएसएमई निर्यात में मामूली कमजोरी दिखती है लेकिन अप्रैल और अगस्त 2017 के दौरान में निर्यात में गिरावट आई। रिपोर्ट यह भी बताती है कि नोटबंदी के बाद एमएसएमई क्षेत्र में कर्ज न लौटा पाने में आ रही मुश्किलों को देखते हुए राहत देने के लिए रिज़र्व बैंक ने कई उपाय भी दिए थे

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