सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मोदी सरकार ने राम मंदिर निर्माण के लिए अयोध्या एक्ट के तहत ली गई 67 एकड़ जमीन को राम मंदिर निर्माण ट्रस्ट को सौंप दिया। लेकिन इस जमीन में कब्रों के होने के बारे में खुलासा हुआ है।

जानकारी के अनुसार, अयोध्या के निवासी हाज़ी मोहम्मद सहित 9 लोगों ने राम मंदिर निर्माण कमेटी को पत्र लिख कहा कि 67 एकड़ जमीन जो केंद्र सरकार ने अयोध्या एक्ट के तहत ली थी और अब उसे ट्रस्ट को दे दिया गया है उसमें 4/5 एकड़ में कब्रगाह भी है।

पत्र में कहा गया है कि आज की तारीख में भले ही वहां कब्र न दिखाई दे, लेकिन वह कब्रगाह है। सन 1949 से 1992 तक उस जगह का दूसरे तरह से इस्तेमाल हो रहा था। आप “सनातम” धर्म के ज्ञाता हैं, आप इस पर विचार करें। पत्र में कमेटी से कहा गया है कि केंद्र सरकार ने इस पर विचार नहीं किया लेकिन आपसे अनुरोध है कि आप इस पर विचार करें। क्या भगवान राम के मंदिर की नींव कब्रगाह पर रखी जा सकती है?

यह पत्र ऐसे समय में लिखा गया जब राम मंदिर निर्माण के लिए दिल्ली में बैठक होने जा रही है। राम मंदिर निर्माण के खाके के साथ जगदगुरु स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती सोमवार को श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र की पहली बैठक में हिस्सा लेने के लिए दिल्ली रवाना हो चुके है।

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के सदस्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ने कहा कि उनकी पहली चिंता अयोध्या में प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर निर्माण को लेकर है। रामकाज पूरा करने के बाद बी वह विश्राम नहीं लेंगे। जगदगुरु स्वामी वासुदेवानंद ने कहा कि अयोध्या में मंदिर निर्माण केबाद अगर शरीर ने साथ दिया तो वह बाबा काशी विश्वनाथ को मुक्त कराने के लिए दूसरे चरण की कारसेवा का श्रीगणेश करेंगे।

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