अयोध्या की बाबरी मस्जिद की जमीन के मालिकाना हक़ को लेकर अब हिन्दू समुदाय के बाद बौद्ध समुदाय ने भी अपना दावा पेश किया है.

टाइम्स ऑफ इंडिया अखबार के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कहा गया कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने विवादित स्थल पर अब तक जो खुदाई की है. उसमे बौद्ध धर्म से जुड़े स्तूप, दीवारें और खंभे भी पाए गए. याचिकाकर्ता के अनुसार, इस भूमि पर पहले बौद्ध विहार था.

विनीत कुमार मौर्य ने बौद्ध समाज की ओर से दायर याचिका में कहा, आखिरी खुदाई इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच के आदेश पर साल 2002-03 में की गई थी. एसआई की खुदाई में स्तूप, गोलाकार स्तूप, दीवारों और स्तंभों के बारे में जानकारी मिलती है जो किसी बौद्ध विहार की विशेषताएं होती हैं.

1990 Unruhen vor der Babri-Moschee vor der Zerstörung 1992 (AP)

मौर्य ने दावा किया है कि इस स्थल पर हिंदू समुदाय के किसी भी मंदिर या अन्य ढांचे होने के सबूत नहीं मिले हैं. उन्होंने कोर्ट में अपील की है कि न्यायालय विवादित स्थल को श्रीवस्ती, कपिलवस्तु, सारनाथ, कुशीनगर की ही तरह बौद्ध विहार घोषित करे.

बता दें कि एसआई की खुदाई का हवाला देते हुए हिन्दू समुदाय की और से अब तक दावा किया गया कि विवादित जमीन पर पहले राम मंदिर था. जिसे मुग़ल शासन में तोड़ दिया गया और उसके स्थान पर मस्जिद का निर्माण किया गया.

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