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अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर जम्मू-कश्मीर के सांबा जिले के रामगढ़ सेक्टर में पाकिस्तानी सैनिकों ने हैवानियत की सारी हदें पार करते हुए सोनीपत  के रहने वाले जवान नरेन्द्र को बेदर्दी से शहीद कर दिया। नरेन्द्र रामगढ सेक्टर में पेट्रोलिंग पर गए थे। उनका अंतिम संस्कार आज (20 सितंबर) हरियाणा के सोनीपत में राजकीय सम्मान के साथ कर दिया गया।

उनके बेटे मोहित ने अपने पिता की शहादत पर गर्व जताया है मगर सरकार से पूछा है कि देश को बताया जाए कि उनके पिता कैसे शहीद हुए? मोहित ने पाकिस्तानी हमले के संबंध में अधिकारियों द्वारा की गई कार्रवाई का भी विवरण मांगा है। दरअसल, बीएसएफ पर आरोप है कि आनन-फानन में चुपके-चुपके शहीद का पोस्टमार्टम कराकर शव परिजनों को सौंप दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तानी सैनिकों ने नरेंद्र सिंह की हत्या कर बर्बरता की सारी हदें पार कर दी। पाक सैनिकों ने नरेंद्र सिंह का पहले गला रेता। शरीर पर करंट लगाए। एक टांग भी काट दी, लेकिन इसके बाद भी जब उनका मन नहीं भरा तो उन्होंने नरेंद्र सिंह की आंख निकाल ली। नरेंद्र सिंह के शव को पाक सैनिकों ने यातनाएं देने के बाद कई गोलियां भी मारी।

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शहीद नरेन्द्र सिंह के बेटे मोहित का कहना है कि, “सरकार यह नहीं बता पा रही है कि मेरे पिता की मौत कैसे हुई। यहां तक की सेना के अफसर भी कुछ नहीं बता पा रहे हैं। हम सीजीओ कॉम्पलेक्स गए वहां भी कुछ सामने नहीं आया।”

शहीद जवान नरेंद्र हरियाणा में सोनीपत जिले के खरखौदा कस्बे के थाना कलां गांव का निवासी है। उनका जन्म वर्ष 1967 में हुआ था। वे 8वीं कक्षा तक की शिक्षा गांव के ही स्कूल में की। इसके बाद 10वीं कक्षा खरखौदा हाई स्कूल से पास की। वर्ष 1987 में नरेंद्र सिंह बीएसएफ में भर्ती हुई और पहली पोस्टिंग गुजरात में थी। नरेंद्र सिंह की तीसरी बार पोस्टिंग जम्मू में हुई थी। इससे पहले दो बार जम्मू कश्मीर में नरेंद्र देश की सेवा कर चुके थे।

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