Sunday, September 19, 2021

 

 

 

बीएसएफ जवान मोहम्मद रमजान को मरणोपरांत शौर्य पदक

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नई दिल्ली: वर्ष 2017 में उत्तर कश्मीर में आतंकवादियों के हाथों शहीद हुए बीएसएफ जवान मोहम्मद रमजान पर्रे को मरणोपरांत शौर्य के लिये पुलिस पदक (पीएमजी) से सम्मानित किया गया। छुट्टी पर उत्तर कश्मीर स्थित अपने घर आये पर्रे को आतंकवादियों ने मार दिया था। पर्रे 2011 में बीएसएफ में शामिल हुए थे।

उनके प्रशस्ति पत्र में लिखा है – पर्रे ने बेहद बहादुरी से आतंकवादियों की मुहिम को नाकाम किया, जो उनका अपहरण करना चाहते थे। लेकिन बाद में आतंकवादियों ने बांदीपोरा जिले के हाजिन गांव में जबरन उनके घर में घुसकर उन्हें गोली मार दी। बाद में उन्होंने दम तोड़ दिया।

नियंत्रण रेखा (एलओसी) एवं अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सीमा पार से पाकिस्तान की ओर से घुसपैठ की कोशिशों को नाकाम करने तथा जम्मू कश्मीर में संघर्ष विराम उल्लंघनों एवं बिना किसी उकसावे के पाकिस्तान की ओर से की जाने वाली गोलीबारी का मुंहतोड़ जवाब देने के लिये सीमा सुरक्षा बल को कुल आठ शौर्य पदक मिले हैं। नवंबर 2016 में एलओसी की प्रभावी सुरक्षा के लिये कांस्टेबल तापस पॉल और सुधीर हेमब्रोम को भी सम्मानित किया गया है।

उनके प्रशस्ती पत्र में लिखा है, ‘‘(गोला बारूद विस्फोट में) घायल होने और बेहद खून बह जाने के बावजूद उन्होंने (पॉल एवं हेमब्रोम ने) गोलीबारी का मुंहतोड़ जवाब देना जारी रखा और पूरी बहादुरी से वहां डटे रहे, जिसके कारण पाकिस्तानी सेना के समर्थन से आतंकवादियों की घुसपैठ की मुहिम नाकाम हो गयी।’’

कांस्टेबल नितिन कुमार को मरणोपरांत, कांस्टेबल प्रवींद कुमार और बरुण कुमार को भी पीएमजी से सम्मानित किया जाएगा। इन्होंने अक्टूबर 2016 में बारामूला में उनकी चौकी पर आतंकवादियों के आत्मघाती हमले को नाकाम किया था। बीएसएफ के अन्य 52 जवानों एवं अधिकारियों को विशिष्ट सेवा के लिये राष्ट्रपति के पुलिस पदक एवं उत्कृष्ट सेवा के लिये राष्ट्रपति के पुलिस पदक से नवाजा गया।

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