1493 से 1519 में बनी ऐतिहासिक सोना मस्जिद भारत-बांग्लादेश में अटूट दोस्ती की शान है। पश्चिम बंगाल के मालदा से महज़ एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस मस्जिद का रखरखाव बांग्लादेश सरकार करती है।

दोनों ही देशों के नागरिक यहाँ इबादत के लिए आते है। बीएसएफ (भारत) और बीजीबी (बांग्लादेश) दोनों मिलकर इस सफर को आसान बनाते हैं। सुल्तान हुसैन शाह ने अपनी पत्नी सोना की याद में इस मस्जिद को बनवाया था।

करीब 45 मीटर इलाके में बनी इस मस्जिद को बनाने में पत्थर और पुरानी ईंटों का इस्तेमाल किया गया था।  बांग्लादेश सरकार ने 1971 बांग्लादेश मुक्ति संग्राम में शहीद हुए सेना के दो अधिकारियों कैप्टन मेहियुद्दीन जहांगीर और मेजर नजमुल की मजार भी यहां बना रखी है।

ये मस्जिद भारतीय सीमा के मालदा जिले में पड़नेवाली बीएसएफ पोस्ट के लिए काफी अहम है। मालदा के लोगों की आस्था इस धार्मिक स्थल के प्रति गहरी है इसलिए बीएसएफ हमेशा ये सुनिश्चित करता है कि जो लोग इस जगह आ रहे हैं उनके पास पूरे कागजात हों और वो किसी गैरकानूनी गतिविधि में लिप्त न हों।

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