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केंद्र में भगवा सरकार के गठन के बाद से ही सरकारी कर्मचारियों का संविधान और कानून की धज्जियाँ उड़ाते हुए दक्षिणपंथी संगठनों के कार्यक्रमों में शामिल होना एक नया चलन बन गया है.

हाल ही में उत्तर प्रदेश के डीजी होमगार्ड सूर्य कुमार शुक्ला ने एक सेमिनार में हिस्सा लेते हुए राम मंदिर बनाने का संकल्प लिया था. जिसके बाद जमकर हंगामा मचा था. अब सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के महानिदेशक (डीजी) केके शर्मा के कोलकाता में सीमा आधारित मुद्दों को लेकर हुए आरएसएस के सम्मेलन में शामिल होने को लेकर विवाद शुरू हो गया है.

दरअसल, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के सहयोगी दल सीमांत चेतना मंच ने दो दिवसीय सम्मेलन आयोजित कराया था. इस मौके पर बीएसएफ के महानिदेशक वर्दी पहनकर सम्मेलन में शामिल हुए थे. इस मामले में अब तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने कड़ा रुख अपनाया है. टीएमसी ने इस मामले को केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह के समक्ष ले जाने की धमकी है.

तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने आरएसएस के कार्यक्रम में वर्दी में डीजी के शामिल होने को लेकर कहा कि ”बीएसएफ के डीजी केके शर्मा आरएसएस समर्थित एनजीओ के समारोह में कोलकाता में वर्दी में क्या कर रहे हैं?” उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को वह गृह मंत्री के समक्ष उठाएंगे.

इसी बीच बीएसएफ मुख्यालय की तरफ से इस मामले में सफाई देते हुए कहा गया है कि यह कार्यक्रम सीमा प्रबंधन अभ्यास पर आधारित बातचीत के लिए था. बीएसएफ की तरफ से किए गए प्रस्तुतिकरण में सीमा प्रबंधन को लेकर उसकी भूमिका और काम की जिम्मेदारी को दर्शाया गया. इसमें सीमावर्ती इलाकों में रह रहे लोगों के लिए बीएसएफ की तरफ से किए जाने वाले सामाजिक कार्यों की चुनौतियों के बारे में बताया गया.

बीएसएफ की तरफ से कहा गया कि सीमावर्ती इलाकों में रह रहे लोगों की सहभागिता के बिना सीमा प्रबंधन नहीं किया जा सकता है. बयान में आगे कहा गया कि सीमावर्ती इलाकों में रह रहे लोग बीएसएफ के आंख और कान है, जिससे कई तरह की चुनौतियों और सीमा प्रबंधन से बचा जा सकता. बयान में कहा गया कि लोगों को यह जताने के लिए अभ्यास किया गया कि बीएसएफ उनकी मददगार है.

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