अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाने वाले सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व जज जस्टिस एके गांगुली ने सोमवार को इस मामले में कहा कि वह अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले से स्तब्ध रह गए थे। उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय का फैसला तर्कों के अनुरूप नहीं है।  इस दौरान उन्होंने वर्तमान सरकार में मुसलमानों की स्थिति को लेकर भी टिप्पणी की और कहा कि अंग्रेजों ने मुसलमानों के हक की रक्षा मौजूदा सरकार से बेहतर ढंग से की थी।

नई दिल्ली स्थित ‘इंडिया इंटरनेशनल सेंटर’ में ‘द कॉन्सिक्वेंसेज ऑफ द अयोध्या जजमेंट ऑफ सुप्रीम कोर्ट’ नाम से आयोजित एक संगोष्ठी में जस्टिस गांगुली ने फैसले के संदर्भ में कई सवाल खड़े किए। अंग्रेजी अखबार ‘द टेलिग्राफ’ के मुताबिक उन्होंने कहा, “बतौर जज मैंने अपने 18 साल के बेहतरीन करियर में कभी भी नहीं सुना कि फैसला पढ़े जाने के बाद भी कुछ जोड़ा गया हो, मेरी पहली प्रतिक्रिया सिर्फ एक वाक्य में यह है कि फैसले का निष्कर्ष तर्कसंगत नहीं है, बल्कि ये पारस्परिक रूप से विनाशकारी है।”

इस दौरान जस्टिस गांगुली ने कहा: “1934 में, सांप्रदायिक गड़बड़ी हुई थी। मस्जिद को नुकसान पहुंचाया गया…। तब यह ब्रिटिश सरकार द्वारा बहाल किया गया था और हिंदुओं पर जुर्माना लगाया गया था। मुझे लगता है कि हमारे कोलोनियल मास्टर्स (अंग्रेजी हुकूमत) ने आज के संवैधानिक रूप से गठित सरकार, जिसकी बुनियाद में धर्मनिरपेक्षता है, उसकी तुलना में अल्पसंख्यकों के अधिकारों की बेहतर ढंग से रक्षा की थी।”

उन्होंने यह भी कहा, “हिंदू के द्वारा मूर्ती संविधान अपनाने के एक महीने बाद मस्जिद में रखी गई थी।” अपने संबोधन में जस्टिस गांगुली ने कहा कि हिंदुओं ने हमेशा अवैध रूप से विवादित स्थल पर अतिक्रमण किया है। उन्होंने सवाल उठाते हुए पूछा, “क्या मस्जिद का विध्वंस करना हिंदुओं का एक उचित अधिकार है?”

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