1947-48 के भारत-पाक युद्ध (Indo-Pak War 1947-48) में शहीद हुए ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान (Brigadier Mohammad Usman) की कब्र क्षतिग्रस्त अवस्था में मिलने पर भारतीय सेना ने नाराजगी जाहीर की है। दरअसल जामिया मिल्लिया इस्लामिया के करीब कई कब्रें अनदेखी का शिकार हैं। कई कब्रों का सामने का हिस्सा ही टूट गया है। इनमे ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान (Brigadier Mohammad Usman) की कब्र भी है।

‘नौशेरा का शेर’ नाम से मशहूर उस्मान ने 50 (इंडीपेंडेंट) पैराशूट रेजिमेंट की अगुवाई की जिसने 1948 में जम्मू-कश्मीर की दो रणनीतिक जगहें- झांगर और नौशेरा- पाकिस्तान से फिर से छीन ली थीं। वह बलूच रेजिमेंट में कमीशन्ड हुए थे और आजादी तक देश की सेवा की।

बंटवारे के समय उन्हें पाकिस्तान का आर्मी चीफ बनने का भी ऑफर दिया गया था लेकिन सच्चे देशभक्त ने यह ऑफर ठुकरा दिया और उसी देश की सेवा करना स्वीकार किया जो उनकी जन्मभूमि थी। उस्मान के जनाज़े में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू, राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद, गवर्नर जनरल सी राजगोपालाचारी और दूसरे कई कैबिनेट मंत्रियों ने शिरकत की थी।

सेना के एक सूत्र ने कहा, ‘कब्र जामिया मिलिया इस्लामिया के क्षेत्राधिकार में आती है इसलिए कब्र के रखरखाव के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन को जिम्मेदार होना चाहिए। अगर वे इसे बनाए नहीं रख सकते तो सेना युद्ध नायक की कब्र की देखभाल करने में पूरी तरह सक्षम है।’

सूत्र ने कहा कि उनके अवशेषों को दिल्ली छावनी क्षेत्र में स्थानांतरित करने की कोई योजना नहीं है। वहीं, जामिया मिलिया इस्लामिया के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘विश्वविद्यालय कब्रिस्तान की चारदिवारी और साफ-सफाई के लिए जिम्मेदार है। हालांकि, कब्रों की देखभाल संबंधित परिवार के सदस्यों द्वारा की जाती है।’

वहीं, जामिया मिलिया इस्लामिया के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ” विश्वविद्यालय कब्रिस्तान की चारदिवारी और साफ-सफाई के लिए जिम्मेदार है। हालांकि, कब्रों की देखभाल संबंधित परिवार के सदस्यों द्वारा की जाती है।”

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