अलीगढ़ मुस्लिम विश्विद्यालय से मुस्लिम शब्द हटाने के सुझाव के बाद अब यूजीसी की एक समिति ने विश्विद्यालय में छात्र और छात्राओं को एक साथ बिठाकर शिक्षा देने की वकालत की है.

UGC की इस समिति ने मोदी सरकार को भेजे अपने प्रस्ताव में AMU में छात्र-छात्राओं के अलग-अलग क्लासरूम को लेकर आपत्ति जताई. साथ ही कहा कि इस व्यवस्था के चलते छात्र प्रोफेशनल कोर्स और फिर पढ़ाई के बाद नौकरी के दौरान भी अपनी झिझक दूर नहीं कर पाते. समिति ने कहा कि इस वजह से उन्हें कई बार इसका नुकसान भी उठाना पड़ता है.

समिति ने अपने प्रस्ताव में शिया-सुन्नी का भी मसला उठाते हुए विश्विद्यालय में  शिया और सुन्नी के लिए अलग-अलग डिपार्टमेंट पर भी आपत्ति जताई. समिति में शामिल विशेषज्ञों का कहना कि जब शिया और सुन्नी दोनों एक ही धर्म पर आधारित पढ़ाई करवाते हैं तो फिर दो अलग-अलग डिपार्टमेंट क्यों?

समिति ने साथ ये भी सलाह दी है कि विश्वविद्यालय में स्नातक के कोर्सों के लिए दाखिले इंजीनियरिंग और मेडिकल के तर्ज पर राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा से होने चाहिए. समिति ने परीक्षा के लिए प्रश्नपत्र, परीक्षा और रिजल्ट आदि का सेटअप तैयार करने की सलाह दी है.

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