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नई दिल्ली. गुजरात के 2002 के दंगों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका का जिक्र करने पर असम पुलिस ने दो लोगों की शिकायत पर चार लेखकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।

12वीं क्लास की राजनीति विज्ञान की इस किताब में पेज नंबर 376 पर लिखा है कि साल 2002 में जब गुजरात में दंगे हो रहे थे, साबरमती एक्सप्रेस के की बोगी को गोधरा स्टेशन पर आग लगा दी गई थी जिसमें 57 लोगों की मौत हुई थी उस वक्त तत्कालीन सीएम नरेंद्र मोदी चुप थे।

किताब के ‘Recent Issues and Challenges’ नाम के आखिरी चैप्‍टर में, ‘Godhra Incident and Anti-Muslim Riot in Gujarat’ नाम का एक सेक्‍शन है। जिसमे असमिया भाषा में लिखा गया है, ”इस घटना में (कोच को आग लगाए जाने) महिलाओं और बच्‍चों समेत 57 लोग मारे गए। इस शक पर कि घटना के पीछे मुस्लिम थे, अगले दिन गुजरात के विभिन्‍न हिस्‍सों में मुस्लिमों पर निर्दयतापूर्वक हमले किए गए। हिंसा एक महीने से ज्‍यादा समय तक चली और हजार से ज्‍यादा लोग मारे गए। मरने वालों में अधिकतर मुसलमान थे। यह बात दीगर है कि हिंसा के समय, नरेंद्र मोदी के नेतृत्‍व वाली भाजपा सरकार मूकदर्शक थी। और तो और, आरोप थे कि राज्‍य के प्रशासन ने हिन्‍दुओं की मदद की।”

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यह किताब 2011 से चल रही है। किताब तीन लोगों ने लिखी है, जिसमें दुर्गा कांता शर्मा, रफीक जमान और मानस प्रोतिम बरुआ शामिल हैं। हालांकि, दुर्गा कांता शर्मा की कुछ साल पहले मौत हो चुकी है। इस किताब में सीएम मोदी की भूमिका पर लिखे गए चैप्टर के खिलाफ सौमित्रा गोस्वामी और मानव ज्योति बोरा ने एफआईआर दर्ज कराई है।

एफआईआर दर्ज कराने वाले लोगों ने आरोप लगाया है कि लेखक और पब्लिशर असम बुक डिपो ने गोधरा दंगों पर झूठी जानकारी देकर छात्रों को गुमराह करने का काम किया है। उन्होंने किताब के सर्कुलेशन पर रोक लगाने की मांग की है।

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