बॉम्बे हाईकोर्ट ने जाकिर नाईक को बड़ा झटका दिया है। हाई कोर्ट ने जाकिर नाईक द्वारा दायर की गई उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उसने अपने खिलाफ दायर की गई राष्ट्रीय जांच एजेंसी की चार्जशीट को चुनौती दी थी।

जस्टिस आर एम सावंत और जस्टिस रेवती मोहिते डेरे की बेंच ने कहा कि उसने जांच एजेंसियों के साथ सहयोग करने में कोई दिलचस्पी या इच्छा नहीं दिखाई है। कोर्ट ने कहा, ‘‘याचिका में मांगी गयी अन्य राहतों के संदर्भ में हमें यह नजर नहीं आता कि यह अदालत कैसे इन बिन्दुओं पर विचार कर सकती है जबकि याचिकाकर्ता जांच एजेंसियों के सामने पेश ही नहीं हुआ। याचिकाकर्ता मलेशिया में बैठा है और वह जांच एजेंसियों को जांच रिपोर्ट जमा करने का निर्देश देने की मांग कर रहा है।’’

जाकिर नाईक ने अपनी याचिका मे राष्ट्रीय जांच एजेंसी और प्रवर्तन निदेशालयको उसके खिलाफ की गयी जांच की रिपोर्ट सौंपने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था। नाईक ने यह भी अनुरोध किया था कि उसके पासपोर्ट के निरसन का आदेश रद्द करने का विदेश मंत्रालय को निर्देश दिया जाये।

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हालांकि बॉम्बे हाई कोर्ट ने माना कि जाकिर नाईक को राहत नहीं दी जा सकती क्योंकि उन्होंने जांच के लिए एजेंसियों के साथ सहयोग नहीं किया है और वह एक घोषित अपराधी है। अदालत ने कहा कि आदर्श स्थिति तो यह है कि नाईक को भारत आना चाहिए था और जांच एजेंसियों के सामने पेश होना चाहिए, ‘इतनी दूर से बात आगे नहीं बढ़ती। याचिकाकर्ता की गैरहाजिरी में हम कैसे ऐसी याचिकाओं पर विचार कर सकते हैं।’

बता दें कि नाईक के खिलाफ आईपीसी की धारा 153 (ए) (विभिन्न धर्मों के बीच वैमनस्य फैलाना) और अवैध गतिविधि रोकथाम अधिनियम की धाराएं 10, 13 और 18 (जिनका संबंध अवैध संघ से संबंधित होने, गैर कनूनी गतिविधियों को बढ़ावा और आपराधिक साजिश से है) के तहत मामला दर्ज है।