बुधवार को बॉम्बे हाई कोर्ट ने बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में रिपब्लिक टीवी की रिपोर्टिंग पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस मामले की जांच चल रही है, उसके बारे में दर्शकों से यह पूछा जाना कि किसे गिरफ्तार किया जाना चाहिए, क्या यह खोजी पत्रकारिता है?

लाइव लॉ के अनुसार कोर्ट ने रिपब्लिक टीवी से कहा, “हम केवल यह कह रहे हैं कि आपको अपनी सीमाओं का पता होना चाहिए और अपनी सीमाओं के भीतर, आपको सब कुछ करने की अनुमति है। क्रॉस-ओवर न करें।” चैनल ने ‘हैशटैग-रिया को गिरफ्तार करो’ का भी उल्लेख किया।

अदालत ने रिपब्लिक टीवी के वकील से यह भी पूछा कि, “जब इस मामले की जांच चल रही है और यह मुद्दा है कि क्या यह एक हत्या या आत्महत्या है और एक चैनल इसे हत्या कह रहा है, तो क्या यह खोजी पत्रकारिता है?” हालांकि इसके जवाब में वकील ने कहा कि यह केवल जनता की ओपिनियन थी।

चैनल की ओर से पेश वकील ने कहा, ‘जनता की राय सामने लाना और सरकार की आलोचना करना पत्रकारों का अधिकार है। यह आवश्यक नहीं है कि चैनलों द्वारा जो प्रसारित किया जा रहा है, हर कोई उसकी सराहना करेगा। हालांकि, यदि किसी समाचार से कोई तबका असहज महसूस करता है, तो यह लोकतंत्र का सार है।’

अदालत ने कहा, ‘हम पत्रकारिता के बुनियादी नियमों का जिक्र कर रहे हैं, जहां आत्महत्या से संबंधित रिपोर्टिंग के लिए बुनियादी शिष्टाचार का पालन करने की जरूरत है। सुर्खियों वाले शीर्षक नहीं, लगातार दोहराव नहीं। आपने यहां तक कि मृतक को भी नहीं छोड़ा, गवाहों को तो भूल जाइए।’ अदालत ने कहा, ‘आपने एक महिला को ऐसे तरीके से पेश किया जो उसके अधिकारों का उल्लंघन है। यह हमारा प्रथम दृष्टया मत है।’

कोर्ट ने सुशांत सिंह राजपूत के मामले में चैनल की रिपोर्टिंग को लताड़ लगाते हुए कहा कि सूइसाइड के मामलों में रिपोर्टिंग की कुछ खास गाइडलाइंस होती हैं और लगता है कि चैनल को मृतक के प्रति कोई सम्मान नहीं है जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

उन्होंने पूछा, ”आपने केवल पोस्टमार्टम के आधार पर कहानी पोस्ट की? अगर आपको सच जानने में इतनी दिलचस्पी है, तो आपको सीआरपीसी पर ध्यान देना चाहिए! कानून की अनदेखी कोई बहाना नहीं है। आप जांचकर्ता और अभियोजक, न्यायाधीश बन जाते हैं। फिर हमारा क्या उपयोग है? हम यहां क्यों आए हैं?”

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