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बोफोर्स खरीद, राफेल सौदा और आरएसटीवी राज्यसभा टेलीविजन) भर्ती के बीच समानता क्या है ???

इन तीनों में गुपचुप काम करने का काफी बड़ा तत्व शामिल था (ये ज़िक्र हथियार की या नौकरी पर लिए जा रहे कर्मियों की क्षमता का जिक्र नहीं)। सभी तीन सौदे लगभग चुपचाप से निपटा दिए गए होते लेकिन मीडिया की नज़र पड़ने की वजह से मामला दुनिया की आंखों में आ गया।

बोफोर्स और राफेल परतो मीडिया में गर्मजोशी से बहस की जा रही हैलेकिनतीसरा मुद्दा, आरएसटीवी भर्ती मुख्य लाइन मीडिया से बाहर है। अग्रणी मीडिया संगठनों ने इसकहानी को सामने लाने में काफी हद तक गुरेज़ किया है। यह मुख्य रूप से इसलिए हो सकता है क्योंकि पिछली बार जब मेनलाइन मीडिया के दो संस्थानोंने आरएसटीवी नीतियों पर सवाल उठाने का प्रयास किया था तो उन्हें ऊपरी सदन से कड़े ‘विशेषाधिकारों का उल्लंघन’की कार्यवाही का सामना करना पड़ा।

दैनिक अंग्रेजी पेपर डीएनए और अग्रणी अंग्रेजी मीडिया पोर्टल तहलकाको आरएसटीवी के बजट पर सवाल उठाने के लिए गंभीर रूप से दंडित किया गया था। और आखिरकार दोनों मीडिया संस्थानों को राज्यसभासे माफी मांगनी पड़ी। तब से प्रमुख मीडिया संस्थानोंमें से कोई भी प्रिंट, टेलीविजन या ऑनलाइन पोर्टलों ने आरएसटीवी से जुड़ी किसी भी कहानी को उठाने  की हिम्मत नहीं की है।

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लगभग दो महीने पहले आरएसटीवी भर्ती प्रक्रिया मेंचल रही अनियमितता पर ऑनलाइन मीडिया में खासी चर्चा हुई थी (https://www.timesheadline.com/opinion/rstv-blatant-biased-bigotry-21646.html)। यह मुद्दा चैनल के कार्यकारी संपादक के चयन से संबंधित था जिसे 7 मई 2018 को विज्ञापित किया गया था और 23 जुलाई 2018 को एक साक्षात्कार तक पहुंचकर थम गया था। प्रक्रिया को नज़दीक से जानने वाले सूत्रों ने तब दावा किया था कि पूरा तामझाम केवल धोखा था और कार्यकारी संपादक के नाम पर निर्णय (ईई) को पहले से ही फरवरी 2018 में लिया गया था। वास्तव में उन्होंने दावा किया कि प्रधान संपादक (ईएनसी) के नाम की सिफारिश करने के लिए बनाई गई खोज और चयन समिति ने न सिर्फ ईएनसी का चयन किया बल्कि बिना किसी अधिकार के कार्यकारी संपादक (ईई) के नाम की भी सिफारिश कर दी । आरएसटीवी सचिवालय ने न तो ईई के नाम की मांग की थी और न ही समिति को सूचित किया था कि ऐसा कोई पद खाली है।

यह स्पष्ट रूप से दिखाता है कि समिति एक पूर्व निर्धारित फैसला करने के इरादे के साथ बैठी थी और किसी मालिक की आवाज के अनुसार सिफारिशें कर रही थी। जानकारों के अनुसार समिति ने ईएनसीके रूप में राहुल महाजन के नाम की और विभाकर के नाम की ईई के पद के लिए सिफारिश की। ईई के पद पर विभाकर की पूर्व निर्धारित नियुक्ति से संबंधित तथ्य आरएसटीवी सचिवालय फ़ाइल में दर्ज हैं।

हालांकि बड़े पैमाने पर मीडिया में हो-हल्ले के कारण कार्यकारी संपादक का नाम घोषित करने का निर्णय स्थगित कर दिया गया था। शायद आरएसटीवी सचिवालय मामला ठंडा होने के लिए इंतजार कर रहा था। और शायद अब वो समय है।

अब जब मीडिया अधिक चर्चित मुद्दों को देखने व्यस्त है, तो आरएसटीवी औपचारिक रूप से कुछ ऐसी घोषणा की जा सकतीहै जो पहले से ही आमचर्चा का विषय है।

एक या दो दिनों के भीतर विभाकर की नियुक्ति की औपचारिक घोषणा कार्यकारी संपादक के रूप में सार्वजनिक की जाएगी।

इस गड़बड़झाले को कानूनी जामा पहनाने के लिए कुछ दिनों पहले एक और विज्ञापन कार्यकारी संपादक (ईई) के पद के लिएआवेदन आमंत्रित करने के लिए प्रकाशित किया गया था। ईई के पद के लिए साक्षात्कार करने के लिए एक समिति का गठन किया गया था।

हालांकि समिति के स्वरूप ही खुद कई सवाल खड़े कर दिए। पिछली समितिए. सूर्यप्रकाश, अध्यक्ष प्रसार भारती की अध्यक्षता में शशि शेखर वेम्पति , प्रसारभारती के सीईओ एवं सीईओ आरएसटीवी (अतिरिक्त), ए ए राव, अतिरिक्त सचिव, राज्यसभा सचिवालय और प्रभारी आरएसटीवी, राहुलश्रीवास्तव, वरिष्ठ पत्रकार शामिल थे। कार्यकारी संपादक आरएसटीवी के चयन के लिए सभी चार को मौजूदा समिति में भीशामिल किया गया था।

यह समिति भी छह सदस्य समिति थी और ऊपर दिए गए नामों से कल्पना के लिए कुछ भी नहीं छोड़ा गया है कि पिछली समिति की सिफारिश कोबदलने की कोईसंभावना नहीं थी। औरयहांमौजूदा समिति के अन्य दो सदस्यों के नामों को देखना चाहिए।

समिति का पांचवां सदस्य खोज और चयन समिति का प्रत्यक्ष लाभार्थी है। समिति का पांचवां सदस्य राहुल महाजन था जिसे अन्य चार सदस्यों ने आरएस टीवी का प्रधान संपादक नियुक्त किया था।।

अब छह सदस्य समिति में पांच सदस्य एक तरफ हों तो निर्णय का अंदाज़ा कोई मुश्किल बात नहीं।

यह देखते हुए कि अध्यक्ष राज्यसभा श्री वेंकैया नायडू 31 अक्टूबर 2018 को एक विदेश यात्रा शुरू कर रहे हैं, विभाकर की नियुक्ति की घोषणा अधिसूचना 31 अक्टूबर या 1 नवंबर 2018 तक आ सकती है।

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