बीजेपी का सच सामने ,HRD मिनिस्टर का AMU के सेंटरों को बंद करने की धमकी,VC से अपमानजनक व्यवहार

11:47 am Published by:-Hindi News
action should be against who want to destroy image of amu

नई दिल्ली ( सदा ए भारत डेस्क ) मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के सभी सेंटरों को बंद करने की धमकी दी है उसके साथ साथ कुलपति ज़मीरुद्दीन शाह को अभद्र शब्दों का प्रयोग भी किया और कहा की वेतन आप को कौन देता है।

ismirti and zameer shah

इस पूरी घटना के बारे में मिल्ली गजट ने विशेष रिपोर्ट तैयार किया है जिस में सूत्रों के हवाले से लिखा है कि दिल्ली में पिछले 8 जनवरी को मिनिस्ट्री के कार्यालय में मंत्री साहिबा से केरल के मुख्यमंत्री ओमन चंडी कई मंत्रियों के साथ केरल के सांसदों ने मालापोरम में स्थित अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के बारे में मुलाकात की और उन्हें ध्यान दिलाया कि उक्त सेंटर केंद्रीय सहायता न मिलने की वजह से विकास नहीं कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार मंत्री साहिबा ने खट्टे लहजे में केरल उच्च प्रतिनिधिमंडल से कहा:” यह और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के दूसरे केंद्र बिना किसी कानूनी अनुमति के बनाए गए हैं, इसलिए वे सब बंद कर दिए जाएंगे। ”

मंत्री महोदया ने कहा ” ऐसे कैसे आप सेंटर खोल सकते हैं? कुलपति कैसे ऐसा कदम उठा सकते है? हम इसके लिए पैसे नहीं देंगे। ” मंत्री महोदया ने इसी कड़ी लहजे में बात जारी रखते हुए कहा, ” इन सेंटरों की कोई जरूरत नहीं थी। मैं उन सभी को बंद कर दूंगी। इस के लिए हम कोई अनुदान नहीं देंगे।” जब केरल के मुख्यमंत्री ने मंत्री साहिबा को बताया कि इस उद्देश्य के लिए हम ने मालापोरम में 345 एकड़ कीमती जमीन दी है ताकि वहाँ एक वैश्विक केंद्र बन सके, तो स्मृति ईरानी ने इसी कड़ी स्वर में उनसे कहा ” आप जमीन वापस ले लीजिए! ”

रिपोर्ट के अनुसार, यह बात चल ही रही थी कि मंत्री महोदया के कमरे में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कुलपति लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) ज़मीरुद्दीन शाह ने प्रवेश किया।

ईरानी ने उनसे पूछा ” आप क्यों आए हैं? ” कुलपति ने कहा: ” मैडम में केरल के मुख्यमंत्री के निमंत्रण पर आया हूँ। ” इस पर स्मृति ईरानी का पारा चढ़ गया और वे बोलीं: ” आप को वेतन कौन देता है? केरल के मुख्यमंत्री या मानव संसाधन मिनिस्ट्री? जाइए और अपने कमरे में बैठए ”।इस अपमानजनक व्यवहार पर कुलपति साहब चुपचाप कमरे से निकल गए,जबकि केरल के मुख्यमंत्री और उनके प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने चुपचाप इस विश्वास न आने वाले हादसे को देखते रहे।

रिपोर्ट के अनुसार इस घटना के एक सप्ताह बाद स्मृति ईरानी तरयूनदरम गईं जहां 14 जनवरी को फिर उनकी मुलाकात केरल के मुख्यमंत्री ओमन चंडी से हुई और यह समस्या का फिर से चर्चा किया। इस बैठक में मंत्री साहिबा ने अपनी स्थिति हल्के बदलते हुए कहा ‘ ‘ हम कोई नया फंड नहीं देंगे। ” सरकार केरल ने इस नए बयान से यह अर्थ निकाला है कि संबंधित सेंटर में अधिक कोर्सेज खोलने और नई सुविधाओं के लिए केंद्र से कोई फंड नहीं मिलेगा। दूसरे शब्दों में केंद्र सरकार चाहती है कि यह सेंटर स्वयं स्वाभाविक मौत मर जाए। इसी बैठक में स्मृति ईरानी ने उक्त सेंटर में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के उच्च विद्यालय खोलने की अनुमति देने से भी इनकार कर दिया।

याद रहे कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय ने 2010 में पांच बाहरी सेंटर खोने का फैसला किया था जो मुर्शिदाबाद,मालापोरम,किशनगंज,भोपाल और पूना में स्थापित थे। और यह सारे सेंटर 2020 आते-आते पूरी तरह से कम्प्लीट काम करना था। इन पांच केंद्र से वर्तमान में केवल तीन खुल सके हैं। मुर्शिदाबाद और मालापोरम में केवल तीन पाठ्यक्रम (एमबीए, बीएड और एलएलबी) और किशनगंज सेंटर में केवल बीएड की शिक्षा दी जा रही है, जबकि बाकी दो सेंटर अभी खुल ही नहीं सके हैं।

काम करने वाले तीनों सेंटरों में मुस्लिम विश्वविद्यालय के उच्च विद्यालय नहीं खुल सका है जबकि स्कूल की वजह से ही इन सेंटरों की उपयोगिता बढ़ेगी और बच्चे उनमें प्रवेश लेंगे क्योंकि मुस्लिम विश्वविद्यालय के कानून के अनुसार अपने उच्च पाठ्यक्रम में अपने स्कूलों के फ़ारग़ीन के लिए 50 प्रतिशत कोटा है। इन स्कूलों को खोलने की अनुमति न देकर केंद्र सरकार इन सेंटरों की उपयोगिता समाप्त कर देना चाहती है।

केरल सरकार ने मालापोरम सेंटर के लिए सिर्फ जमीन ही नहीं दी बल्कि उसका इंफ्रास्ट्रक्चर यानी सड़क,पानी आदि की भी व्यवस्था काफी पैसे खर्च करके किया। माला पुरम सेंटर 2010 में स्थापित हुआ और परियोजना के अनुसार 2015 में इसमें तेरह हजार छात्रों का अध्ययन करते और केन्द्र में 13 पाठ्यक्रम पढ़ाए जा रहे होते,लेकिन स्थिति यह है कि वर्तमान में इसमें केवल चार सौ बच्चे पढ़ रहे हैं और वहाँ केवल तीन पाठ्यक्रम पढ़ाए जा रहे हैं । मुर्शिदाबाद में भी यही स्थिति है। इसका स्पष्ट मतलब है कि जल्द ही यह केन्द्र अपने आप बंद हो जाएंगे क्योंकि इतने दुर्लभ छात्रों और इतने दुर्लभ पाठ्यक्रम के लिए इतना बड़ा परिसर चलाने के लिए होने वाले बड़े खर्च का कोई औचित्य नहीं रहेगा।

मौजूदा मंत्री के विपरीत जब तत्कालीन मानव संसाधन विकास के उस वक़त के मिंस्टर सिब्बल,मालापोरम सेंटर की एक नई बिल्डिंग का उद्घाटन करने 24 दिसंबर 2011 को गए थे तो अपने भाषण में उन्होंने घोषणा की थी: ” पैसे की जरूरत होगी तो हमारे द्वारा कोई कमी नहीं होगी। ‘

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