मुंबई | महारष्ट्र में हुए नगर निगम चुनावो के दौरान सैनिको के खिलाफ आपत्तिजनक बयान देने के मामले में महाराष्ट्र विधान परिषद् ने एक विधान पार्षद को निलंबित कर दिया. विधान पार्षद के खिलाफ कार्यवाही को लेकर पिछले तीन दिन से सदन में हंगामा किया जा रहा था. हालाँकि विधान पार्षद ने अपने बयान के लिए पहले ही माफ़ी मांग ली थी लेकिन सदन में उनके निलंबन की मांग उठती रही.

दरअसल सोलापुर से निर्दलीय एमएलसी प्रशांत परिचारक ने नगर निकाय चुनावो के दौरान बीजेपी उम्मीदवार के समर्थन में एक रैली को संबोधित किया. इस रैली में प्रशांत ने सैनिको के प्रति बेहद ही अप्पत्तिजनक बयान दिया जिस पर बवाल हो गया. मामला बढ़ता देख प्रशांत ने माफ़ी मांगते हुए अपना बयान वापिस ले लिया. प्रशांत को बीजेपी से समर्थन प्राप्त है.

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प्रशांत ने रैली में कहा की था की एक सैनिक को अपनी पत्नी का टेलीग्राम आता है जिसमे सैनिक को पता चलता है की उसके यहाँ बेटा हुआ है. इस ख़ुशी में वो पूरी यूनिट में मिठाई बांटता है लेकिन कुछ देर बाद उसको याद आता है की वो तो एक साल से घर ही नही गया. हमारी राजनीती भी कुछ इसी तरह की हो चुकी है. हम सब इस स्तर की राजनीती पर उतर आये है.

प्रशांत के इस बयान ने तूल पकड़ा और सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने प्रशांत के निलंबन की मांग की. चौकाने वाली बात यही की विपक्ष की मांग पर शिवसेना ने भी हाँ में हाँ मिलाई. तीन दिन से इस मामले को लेकर सदन की कार्यवाही को बाधित किया जा रहा था. गुरुवार को विधान परिषद के अध्यक्ष रामराजे निम्बालकर ने प्रशांत को निलंबित करने का आदेश दिया. इसके अलावा उनकी अध्यक्षता में एक जाँच कमिटी का गठन किया गया जो मामले की जांच कर मानसून सत्र में अपनी रिपोर्ट देगी.

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